Aditya Birla और ICICI Prudential हाइब्रिड फंड: कौन बेहतर? जानें लंबी और छोटी अवधि का प्रदर्शन

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AuthorMehul Desai|Published at:
Aditya Birla और ICICI Prudential हाइब्रिड फंड: कौन बेहतर? जानें लंबी और छोटी अवधि का प्रदर्शन

अगर आप म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करते हैं, तो आपको पता होगा कि अलग-अलग समय-सीमा पर फंड्स का प्रदर्शन (Performance) बदलता रहता है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, आदित्य बिड़ला एसएल इक्विटी हाइब्रिड '95 फंड (Aditya Birla SL Equity Hybrid '95 Fund) ने एक महीने में सबसे ज्यादा **4.9%** का रिटर्न दिया है। वहीं, लंबी अवधि की बात करें तो आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इक्विटी एंड डेट फंड (ICICI Pru Equity & Debt Fund) पिछले तीन सालों में **15.9%** के रिटर्न के साथ अव्वल रहा है।

छोटी अवधि में आदित्य बिड़ला का जलवा

पिछले 6 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, आदित्य बिड़ला एसएल इक्विटी हाइब्रिड '95 फंड ने एक महीने में 4.9% का रिटर्न देकर टॉप पोजिशन हासिल की। इस रेस में एचडीएफसी हाइब्रिड इक्विटी फंड (HDFC Hybrid Equity Fund) 4.8% के साथ दूसरे और फ्रैंकलिन इंडिया एग्रेसिव हाइब्रिड फंड (Franklin India Aggressive Hybrid Fund) 4.6% के साथ तीसरे स्थान पर रहा। ये आंकड़े उन फंड्स के लिए हैं जिनका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) कम से कम ₹1,500 करोड़ है।

लंबी अवधि में ICICI Prudential की दमदार पकड़

लेकिन, जब बात लंबी अवधि के प्रदर्शन की आती है, तो तस्वीर बदल जाती है। ₹50,000 करोड़ से ज्यादा की एसेट वाले आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इक्विटी एंड डेट फंड ने पिछले एक साल में 4.0% का रिटर्न दिया, जो इसके बेंचमार्क से 2.7% ज्यादा है। वहीं, तीन साल की अवधि में इस फंड ने 15.9% का शानदार रिटर्न देकर निवेशकों का भरोसा जीता है।

क्यों बदलता है प्रदर्शन?

यह अंतर साफ दिखाता है कि सिर्फ हालिया रिटर्न देखकर निवेश का फैसला लेना गलत हो सकता है। एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स इक्विटी (Equity) से ग्रोथ और डेट (Debt) से स्थिरता का तालमेल बिठाते हैं। शेयर बाजार (Stock Market) और ब्याज दरों (Interest Rates) के बदलते माहौल के कारण, किसी फंड की रणनीति किसी एक समय-सीमा के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है।

निवेशक क्या करें?

निवेशकों को इन फंड्स की एसेट एलोकेशन (Asset Allocation) रणनीति को समझना चाहिए। जो फंड कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों पर ज्यादा निर्भर करते हैं, वे जल्दी मुनाफा दे सकते हैं, लेकिन उनमें जोखिम भी ज्यादा होता है। दूसरी ओर, डाइवर्सिफाइड (Diversified) अप्रोच वाले फंड्स शायद शुरुआत में थोड़ा धीमे लगें, लेकिन लंबे समय में वे ज्यादा स्थिर रिटर्न देते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी स्कीम को चुनते समय निवेशक के अपने निवेश लक्ष्य (Investment Horizon) को ध्यान में रखना चाहिए। अगर आप तीन से पांच साल या उससे ज्यादा समय के लिए निवेश करने की सोच रहे हैं, तो मासिक या तिमाही रिपोर्ट के बजाय फंड के लंबे समय के प्रदर्शन ट्रैक रिकॉर्ड पर ध्यान देना चाहिए।

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