Aditya Birla Sun Life AMC के CIO हरीश कृष्णन ने निवेशकों को खराब क्वालिटी वाले स्मॉल-कैप स्टॉक्स से दूर रहने की सलाह दी है। अगस्त 2026 में स्मॉल-कैप फंड्स में **₹7,973 करोड़** का रिकॉर्ड निवेश हुआ है, लेकिन कृष्णन का मानना है कि कई कंपनियां बिना किसी मजबूत बिजनेस फंडामेंटल के भारी प्रीमियम पर ट्रेड कर रही हैं।
वैल्युएशन का गणित और जोखिम
स्मॉल-कैप सेगमेंट में इस वक्त तेजी का माहौल है, लेकिन हरीश कृष्णन ने निवेशकों को सतर्क किया है। वर्तमान में स्मॉल-कैप स्टॉक्स अपने लॉन्ग-टर्म एवरेज प्राइस से लगभग 49% ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। जब पूरी इंडस्ट्री के शेयर इतनी तेजी से भागते हैं, तो उन कंपनियों को चुनना मुश्किल हो जाता है जो वाकई अपनी ऊंची कीमत के लायक हैं।
कैसे पहचानें 'क्वालिटी'?
कृष्णन के अनुसार, 'क्वालिटी-डेफिसिएंट' यानी कमजोर बिजनेस वे हैं जिनके पास कोई स्पष्ट प्रतिस्पर्धात्मक लाभ (Competitive Advantage) नहीं है, जिनका कैश फ्लो खराब है, या जो फाइनेंशियल अनुशासन का पालन नहीं करतीं। बाजार में घरेलू निवेशकों का पैसा एक कुशन की तरह काम कर रहा है, जिससे कमजोर कंपनियों के शेयर भी बिना किसी दम के ऊपर चढ़ रहे हैं।
निवेशकों के लिए निवेश की रणनीति
निवेशकों को अब अंधाधुंध पैसा लगाने के बजाय इन तीन पैमानों पर कंपनियों को तौलना चाहिए:
- अर्निंग्स विजिबिलिटी: कंपनी का भविष्य का मुनाफा कितना सटीक है?
- हेल्थी बैलेंस शीट: कर्ज का स्तर कितना कम है और कंपनी पैसे का उपयोग कितनी दक्षता से कर रही है?
- कंपिटिटिव एडवांटेज: क्या कंपनी आर्थिक मंदी में भी अपना प्रॉफिट मार्जिन बचा सकती है?
साफ है कि केवल पिछले परफॉरमेंस को देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। बाजार की अस्थिरता और ग्लोबल फैक्टर्स को देखते हुए, पोर्टफोलियो की समीक्षा करना और फंडामेंटल रूप से मजबूत शेयरों पर दांव लगाना ही समझदारी है।
