Aditya Birla SL Equity Hybrid '95 Fund: एक महीने में सबसे आगे, पर लंबी दौड़ में कौन?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Aditya Birla SL Equity Hybrid '95 Fund: एक महीने में सबसे आगे, पर लंबी दौड़ में कौन?

म्यूचुअल फंड की दुनिया में, Aditya Birla SL Equity Hybrid '95 Fund ने पिछले एक महीने में ज़बरदस्त वापसी की है। इसने एग्रेसिव हाइब्रिड म्यूचुअल फंड कैटेगरी में **0.2%** का रिटर्न देकर टॉप पोजिशन हासिल की है। लेकिन, लंबी अवधि के प्रदर्शन पर नज़र डालें तो कहानी थोड़ी अलग है।

Detailed Coverage

क्या है एक महीने का जलवा?

26 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, एग्रेसिव हाइब्रिड म्यूचुअल फंड कैटेगरी में शॉर्ट-टर्म परफॉर्मेंस रैंकिंग में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। Aditya Birla SL Equity Hybrid '95 Fund ने पिछले एक महीने में 0.2% का शानदार रिटर्न दिया है। यह प्रदर्शन इसके बेंचमार्क से 1.0% ज़्यादा है, जिसने इसी अवधि में 0.9% की गिरावट दर्ज की थी।

इस फंड के बाद, Bandhan Aggressive Hybrid Fund ने 0.1% का रिटर्न दिया, जबकि Bank of India Mid & Small Cap Equity & Debt Fund का रिटर्न -0.2% रहा। ये आंकड़े उन फंड्स के लिए हैं जिनका एसेट बेस ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा है।

लंबी दौड़ में कौन आगे?

हालांकि फंड्स की रैंकिंग तेजी से बदलती है, पर फंड का साइज़ (Assets Under Management) एक बड़ा फैक्टर होता है। SBI Equity Hybrid Fund, जो इसी ग्रुप में टॉप फाइव प्रदर्शन करने वाले फंड्स में से एक है, के पास सबसे बड़ा एसेट बेस है, जो ₹85,633.5 करोड़ है। यह बड़ा साइज़ अक्सर फंड मैनेजर के इक्विटी और डेट सेगमेंट में कैपिटल डिप्लॉयमेंट को प्रभावित करता है।

पर जैसे ही हम एक महीने की अवधि से आगे बढ़ते हैं, परफॉर्मेंस का नज़ारा बदल जाता है। Bank of India Mid & Small Cap Equity & Debt Fund, जिसने एक महीने में पिछड़ गया था, अब लंबी अवधि में कैटेगरी को लीड कर रहा है। इस फंड ने पिछले छह महीनों में 13.9% और पिछले एक साल में 7.9% का रिटर्न दिया है। तीन साल की अवधि में भी इसका प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है, 17.8% के रिटर्न के साथ।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स का मकसद इक्विटी के ज़रिए ग्रोथ और डेट के ज़रिए स्थिरता बनाए रखना होता है। चूंकि ये फंड्स लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स के साथ-साथ डेट इंस्ट्रूमेंट्स का अलग-अलग मिश्रण रखते हैं, इसलिए मार्केट की कंडीशन के हिसाब से इनके रिटर्न में काफी फर्क आ सकता है।

जो फंड एक गिरते बाज़ार में अपने डेट एलोकेशन के कारण अच्छा प्रदर्शन करता है, वह तेज़ी वाले बाज़ार में पीछे रह सकता है। एक महीने, छह महीने और तीन साल की अवधि में रैंकिंग के अंतर से यह साफ है कि सिर्फ एक महीने की लीडरशिप क्वालिटी का पक्का पैमाना नहीं है। निवेशकों को सबसे हालिया मासिक रैंकिंग पर ही ध्यान देने के बजाय, यह देखना चाहिए कि क्या फंड का लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस उनके फाइनेंशियल गोल्स के अनुरूप है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.