म्यूचुअल फंड की दुनिया में क्रेडिट रिस्क फंड्स ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, Aditya Birla Sun Life Credit Risk Fund ने पिछले 1 साल में **12.2%** का शानदार रिटर्न दिया है, जो अपने कैटेगरी में सबसे बेहतर है। वहीं, SBI Credit Risk Fund ने 1 और 3 महीने की अवधि में बेहतर प्रदर्शन किया है।
कौन आगे, कौन पीछे?
अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, क्रेडिट रिस्क म्यूचुअल फंड्स के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। Aditya Birla Sun Life Credit Risk Fund ने 1 साल की अवधि में 12.2% का रिटर्न देकर अपनी कैटेगरी में टॉप पोजिशन हासिल की है। यह आंकड़ा इसके बेंचमार्क इंडेक्स के 2.6% रिटर्न से काफी बेहतर है। वहीं, SBI Credit Risk Fund ने छोटी अवधि, यानी 1 महीने और 3 महीने में क्रमशः 1.1% और 3.6% का रिटर्न देकर बाजी मारी है।
क्रेडिट रिस्क फंड्स क्या हैं?
यह समझना ज़रूरी है कि क्रेडिट रिस्क फंड्स, सामान्य डेट फंड्स से अलग होते हैं। नियमों के मुताबिक, इन फंड्स को अपने कुल निवेश का कम से कम 65% हिस्सा ऐसी कॉरपोरेट बॉन्ड्स में लगाना होता है जिनकी रेटिंग 'AA' या उससे कम हो। इसका मकसद उन कंपनियों को उधार देकर ज़्यादा इंटरेस्ट इनकम कमाना है जिनकी क्रेडिट रेटिंग टॉप कंपनियों से कम होती है। हालांकि, जब इकोनॉमी स्थिर होती है तो यह स्ट्रैटेजी ज़्यादा रिटर्न दे सकती है, लेकिन इसमें वे जोखिम भी शामिल हैं जो गवर्नमेंट बॉन्ड्स जैसे सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स में नहीं होते।
फंड्स का साइज और अन्य खिलाड़ी
इस एनालिसिस में उन फंड्स को शामिल किया गया है जिनका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) कम से कम ₹1,500 करोड़ है। HDFC Credit Risk Debt Fund इस सेगमेंट में एक बड़ा खिलाड़ी है, जिसका AUM ₹7,665 करोड़ से ज़्यादा है। यह दर्शाता है कि ये फंड्स रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स से काफी बड़ा फंड मैनेज करते हैं। ICICI Prudential और Nippon India जैसे अन्य फंड्स भी इस कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम
क्रेडिट रिस्क फंड्स में निवेश करने वाले निवेशकों को तीन मुख्य जोखिमों के बारे में पता होना चाहिए:
- क्रेडिट रिस्क: इस बात की संभावना कि जिस कंपनी का बॉन्ड फंड के पोर्टफोलियो में है, वह ब्याज या मूलधन चुकाने में चूक सकती है।
- लिक्विडिटी रिस्क: चूंकि ये बॉन्ड कम रेटेड होते हैं, इसलिए अगर कई निवेशक एक साथ पैसा निकालना चाहें तो इन्हें जल्दी बेचना मुश्किल हो सकता है।
- इंटरेस्ट रेट सेंसिटिविटी: अगर मार्केट में इंटरेस्ट रेट बढ़ता है, तो फंड के पोर्टफोलियो में मौजूद पुराने बॉन्ड्स की वैल्यू गिर सकती है।
भविष्य में इन फंड्स का प्रदर्शन काफी हद तक उन कंपनियों की क्रेडिट क्वालिटी पर निर्भर करेगा जिन्हें वे फंड दे रहे हैं और ओवरऑल इकोनॉमिक माहौल पर। निवेशकों के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे अपने फंड्स के पोर्टफोलियो को देखें ताकि पता चल सके कि फंड मैनेजर कम रेटेड डेट में ज़्यादा निवेश कर रहा है या हाई-क्वालिटी पेपर्स पर फोकस कर रहा है।
