बाजार में अब AI-आधारित ETFs ने दस्तक दे दी है, जो इंसानी दखल के बिना ही शानदार रिटर्न दे रहे हैं। ये फंड्स S&P 500 को भी पछाड़ रहे हैं, लेकिन क्या ये गिरावट के समय सुरक्षित हैं? आइए समझते हैं।
दुनियाभर में निवेश के नए तौर-तरीके विकसित हो रहे हैं, जहां अब फंड मैनेजर की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फैसले ले रहा है। ये ऑटोनॉमस ETFs बिना किसी इंसानी भावना के डेटा प्रोसेस कर रहे हैं और मार्केट बेंचमार्क को मात दे रहे हैं।
आंकड़ों का जादू
FinQ US Large-Cap AI-managed ETF ने फरवरी से अब तक 25.35% का रिटर्न दिया है। वहीं, Ai Funds का 'High Conviction US Equity AI-Managed ETF' भी अगस्त में लॉन्च होने के बाद 2.7% का रिटर्न दर्ज कर चुका है, जबकि इसी दौरान S&P 500 का रिटर्न सिर्फ 1.1% रहा है। हालांकि, ये अभी शुरुआती दौर है और इन फंड्स के पास कुल एसेट्स लगभग $30 मिलियन हैं, जो $17 ट्रिलियन के ग्लोबल ETF सेक्टर के मुकाबले बहुत छोटे हैं।
'ब्लैक बॉक्स' का बड़ा जोखिम
विशेषज्ञों की चिंता इस बात पर है कि जब बाजार में भारी गिरावट आएगी, तो ये एल्गोरिदम कैसे काम करेंगे? इसे 'ब्लैक बॉक्स' रिस्क कहा जा रहा है, क्योंकि संकट के समय AI के अंदरूनी तर्क को समझना मुश्किल हो सकता है।
भारतीय निवेशकों के लिए सीख
भारत में स्थिति अलग है। SEBI के नियमों के मुताबिक, म्यूचुअल फंड में एक इंसान (फंड मैनेजर) का जवाबदेह होना अनिवार्य है। भारत में इस्तेमाल होने वाले 'Quant फंड्स' एआई और एल्गोरिदम का इस्तेमाल डेटा स्क्रीन करने के लिए तो करते हैं, लेकिन वहां इंसानी निगरानी (Human Oversight) एक सेफ्टी नेट की तरह मौजूद रहती है।
आजकल Pictet Asset Management और Man Group जैसी दिग्गज कंपनियां भी एआई का इस्तेमाल सिर्फ एक टूल के तौर पर कर रही हैं, जहां ड्राइवर की सीट पर अभी भी एक इंसान बैठा है। निवेशकों के लिए सलाह यही है कि निवेश के इन नए प्रयोगों को तभी परखें जब वे कठिन मार्केट कंडीशन्स में खुद को साबित कर लें।
