360 ONE MF की नई स्कीम: मार्केट की उठापटक से निपटने के लिए लॉन्ग-शॉर्ट फंड लॉन्च

MUTUAL-FUNDS
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
360 ONE MF की नई स्कीम: मार्केट की उठापटक से निपटने के लिए लॉन्ग-शॉर्ट फंड लॉन्च
Overview

360 ONE Mutual Fund ने स्मॉल और मिड-कैप शेयरों पर फोकस करते हुए एक नया इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड लॉन्च किया है। यह फंड डेरिवेटिव हेजिंग का इस्तेमाल करेगा, जिससे रिस्क को मैनेज किया जा सके। यह कंपनी के स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म का एक बड़ा कदम है, जिसके पास अभी **₹13,400 करोड़** से ज्यादा की असेट्स हैं।

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डेरिवेटिव्स के सहारे इक्विटी में नई स्ट्रैटेजी

DynaSIF Equity Ex-Top 100 Long-Short Fund का लॉन्च, खासतौर पर छोटी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के लिए मार्केट की बढ़ती अनिश्चितता से निपटने का एक नया तरीका है। 360 ONE सीधे तौर पर उन शेयरों पर दांव लगा रहा है जो टॉप 100 से बाहर हैं। माना जा रहा है कि इन छोटे शेयरों में ज्यादा मुनाफा कमाने की क्षमता है।

यह फंड पारंपरिक लॉन्ग-ओनली फंड्स से अलग है, जो मार्केट में गिरावट आने पर पूरी तरह जोखिम में रहते हैं। इस नए स्ट्रक्चर में 25% तक अनहेजेड शॉर्ट पोजीशन लेने की क्षमता है। इसका मतलब है कि जब मार्केट में बड़ी गिरावट आती है, तो यह फंड पोर्टफोलियो के बीटा (बाजार की चाल के साथ स्टॉक की संवेदनशीलता) को कम करने में मदद करेगा।

फंड का स्ट्रैटेजिक एलोकेशन

इस फंड में कम से कम 65% पैसा मिड- और स्मॉल-कैप सेगमेंट में लगाया जाएगा। बाकी रकम बड़े-कैप शेयरों या फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स जैसे ट्रेजरी बिल्स और कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में लगाई जा सकती है। स्मॉल-कैप शेयरों में लिक्विडिटी (तरलता) कम होने की वजह से यह फ्लेक्सिबिलिटी जरूरी है।

BSE 500 टोटल रिटर्न इंडेक्स को बेंचमार्क बनाकर, फंड मैनेजर इस प्रोडक्ट को एक हाइब्रिड इंस्ट्रूमेंट की तरह पेश कर रहे हैं। इसका मकसद है कि बाजार के बड़े उतार-चढ़ाव का फायदा उठाया जाए और साथ ही डेरिवेटिव्स का इस्तेमाल करके व्यक्तिगत शेयरों या सेक्टर से जुड़े बड़े नुकसान से बचा जा सके। फरवरी और मार्च में ऐसे ही दो फंड लॉन्च करने के बाद, यह इस प्लेटफॉर्म पर तेजी से विस्तार का संकेत देता है, क्योंकि 360 ONE म्यूचुअल फंड के रैपर में हेज फंड जैसी स्ट्रैटेजी की डिमांड को पूरा कर रहा है।

क्या हैं जोखिम?

इस स्ट्रैटेजी में सबसे बड़ा रिस्क एग्जीक्यूशन की जटिलता और लागत का बढ़ना है। डेरिवेटिव-आधारित स्ट्रैटेजी में आमतौर पर सामान्य इक्विटी स्कीम्स की तुलना में ट्रांजैक्शन कॉस्ट ज्यादा होती है। अगर मार्केट वैसा नहीं चला जैसा उम्मीद थी, तो यह खर्च मुनाफे को कम कर सकता है।

इसके अलावा, मिड- और स्मॉल-कैप स्पेस में शॉर्ट पोजीशन लेने में लिक्विडिटी का भारी रिस्क है। अगर अंडरलाइंग शेयरों में लिक्विडिटी की कमी हो जाती है, तो शॉर्ट पोजीशन को कवर करना मुश्किल हो सकता है, जिससे नुकसान और बढ़ सकता है।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सामान्य सब्सक्राइबर्स के लिए मिनिमम एंट्री अमाउंट ₹10 लाख है। यह फंड के रिटेल पहुंच को सीमित करता है और यह हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) के लिए एक टार्गेटेड अप्रोच दिखाता है, जिनके पास पहले से ही मार्केट में दूसरी जगहों पर बड़ी हिस्सेदारी हो सकती है।

भविष्य की राह और मैनेजमेंट

360 ONE प्लेटफॉर्म पर कुल असेट्स लगभग ₹13,403 करोड़ तक पहुंच गई हैं। ऐसे में कंपनी पर अपने बढ़ते प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में लगातार अच्छा प्रदर्शन दिखाने का दबाव बढ़ रहा है। मैनेजमेंट टीम, जिसमें मयूर पटेल और हर्ष अग्रवाल शामिल हैं, को ऐसे बाजार में काम करना है जहां स्मॉल-कैप वैल्यूएशन ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर हैं। इससे मीन रिवर्जन (वापस औसत स्तर पर आने) का खतरा बढ़ जाता है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह फंड लंबी अवधि में कैपिटल एप्रिसिएशन को कुर्बान किए बिना अपनी हेजिंग की प्रभावशीलता को बनाए रख पाता है। यही 2026 के फाइनेंशियल ईयर के बाकी समय के लिए कंपनी का सबसे महत्वपूर्ण परफॉर्मेंस मीट्रिक होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.