अक्टूबर 2026 में शेयर बाजार की हलचल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक साथ मोटा पैसा लगाने के बजाय 'सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान' (STP) का इस्तेमाल करें, ताकि मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचा जा सके।
अक्टूबर 2026 का बाजार निवेशकों के लिए असमंजस भरा है। कैश लेकर बैठे निवेशक इस बात से डरे हुए हैं कि कहीं निवेश करने के अगले ही दिन मार्केट क्रैश न हो जाए। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि इस अनिश्चितता के दौर में 'सिंगल शॉट' निवेश करना गलत फैसला हो सकता है।
STP है रामबाण उपाय
बाजार के जोखिम को कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका 'सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान' (STP) है। इसमें आप अपनी पूरी रकम को एक साथ इक्विटी में लगाने के बजाय पहले किसी लिक्विड या डेट फंड में पार्क करते हैं। इसके बाद अगले 3 से 6 महीनों तक एक तय हिस्सा धीरे-धीरे इक्विटी फंड में ट्रांसफर किया जाता है। इससे 'रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग' का फायदा मिलता है और आप महंगे भाव पर खरीदारी करने से बच जाते हैं।
फंड कैटेगरी का चुनाव
इस समय स्मॉल-कैप और मिड-कैप में वैल्युएशन काफी ऊंची दिख रही है, इसलिए जानकारों की सलाह फ्लेक्सी-कैप और मल्टी-कैप फंड्स की ओर ज्यादा है। ये फंड्स मैनेजर को यह आजादी देते हैं कि वे मार्केट की स्थिति के हिसाब से लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप शेयरों के बीच पैसा शिफ्ट कर सकें। अगर आप और अधिक सुरक्षा चाहते हैं, तो 'मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड' चुन सकते हैं, जो इक्विटी के साथ-साथ डेट और गोल्ड में भी निवेश करते हैं।
इन जोखिमों का रखें ध्यान
STP का एक बड़ा नुकसान 'अपॉर्चुनिटी कॉस्ट' है। अगर मार्केट अचानक से तेजी से रिकवर कर गया, तो लिक्विड फंड में रखा आपका पैसा इक्विटी के मुकाबले कम रिटर्न देगा। साथ ही, बहुत लंबा STP पीरियड (जैसे 18 से 24 महीने) रखना भी सही नहीं है, क्योंकि इससे आप बाजार की रिकवरी का फायदा उठाने से चूक सकते हैं। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि बाजार की टाइमिंग को पकड़ने के बजाय लंबे नजरिए के साथ निवेश करें और थीमैटिक फंड्स से इस समय दूरी बनाए रखें।
