Zomato ने अपना 18वां जन्मदिन एक अनोखे तरीके से मनाया, लेकिन एक फुल-पेज लाल विज्ञापन जिसमें कोई लोगो नहीं था, ग्राहकों को भ्रमित कर गया। इस कैंपेन ने लोगों को एयरटेल और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे लाल रंग वाले ब्रांड्स से कन्फ्यूज कर दिया। यह दिखाता है कि भारत के कॉम्पिटिटिव मार्केट में ब्रांड रिकॉल कितना मुश्किल है, जहाँ कई बड़े ब्रांड एक ही रंग का इस्तेमाल करते हैं।
Zomato का अनोखा मार्केटिंग मूव!
Zomato ने हाल ही में अपने 18वें जन्मदिन के मौके पर The Times of India अखबार में एक बिल्कुल हटके कैंपेन चलाया। कंपनी ने एक पूरा पेज लाल रंग के विज्ञापन से भरा, जिस पर सिर्फ लिखा था "happy 18th birthday to us."। खास बात यह थी कि इस विज्ञापन में Zomato का कोई लोगो, कोई सर्विस का ज़िक्र या कोई भी पहचान चिन्ह नहीं था। कंपनी को उम्मीद थी कि सिर्फ रंग से ही लोग उन्हें पहचान जाएंगे।
ब्रांड पहचान पर असर और कन्फ्यूजन
लेकिन इस बोल्ड कदम का उल्टा असर हुआ और लोगों में ज़बरदस्त कन्फ्यूजन फैल गया। भारत में कई बड़े ब्रांड्स जैसे Airtel, Vi, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank भी लाल रंग का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए Zomato का यह विज्ञापन सीधे तौर पर किसी एक ब्रांड से नहीं जुड़ पाया। जहाँ Zomato ऐप के रेगुलर यूज़र्स शायद इसे पहचान गए हों, वहीं अखबार पढ़ने वाले आम लोगों को समझ नहीं आया कि यह किसका विज्ञापन है। इस कन्फ्यूजन को और हवा तब मिली जब Kotak Mahindra Bank ने सोशल मीडिया पर इसी तरह के लाल रंग का पोस्ट करके इस एम्बिगुइटी का फायदा उठाया।
मार्केटिंग स्ट्रैटेजी पर बहस
मार्केटिंग एक्सपर्ट्स इस कैंपेन को लेकर बंटे हुए हैं। कुछ का मानना है कि यह एक बहुत बड़ा कदम था, जिससे ब्रांड कॉन्फिडेंस का टेस्ट हुआ और बिना किसी पारंपरिक मार्केटिंग के ऑर्गेनिक बातचीत शुरू हुई। सिर्फ जरूरी एलिमेंट्स हटाकर, कंपनी ने एक ऐसी पब्लिक डिस्कशन को जन्म दिया जिसने कुछ समय के लिए ब्रांड को अटेंशन के सेंटर में रखा।
वहीं, दूसरी तरफ, आलोचकों का कहना है कि इस कन्फ्यूजन से पता चलता है कि ब्रांड की अपनी एक अलग पहचान बनाना कितना मुश्किल है। एक ऐसे मार्केट में जहाँ रंग को लेकर कॉम्पिटिशन है, यह कैंपेन यह दिखाता है कि आम जनता के मन में लाल रंग सिर्फ Zomato से जुड़ा हुआ नहीं है। इसके अलावा, यह कैंपेन काफी हद तक सोशल मीडिया पर हुई बातचीत पर निर्भर रहा, जो दिखाता है कि फिजिकल विज्ञापन की अपनी ताकत कमज़ोर पड़ सकती है।
निवेशकों के लिए, इस तरह के मार्केटिंग प्रयोग कंपनी के आक्रामक रुख को दर्शाते हैं, खासकर फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स जैसे भीड़ भरे सेक्टर में अपनी पहचान बनाने के लिए। अब यह देखना होगा कि क्या कंपनी इस हाई-विजिबिलिटी मार्केटिंग को यूज़र ग्रोथ और प्रॉफिट में बदल पाती है, खासकर जब वे बड़े प्रतिद्वंद्वियों और बदलते डिजिटल ट्रेंड्स के बीच अपनी जगह बना रहे हैं। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि क्या कंपनी भविष्य में और ट्रेडिशनल ब्रांड कम्युनिकेशन की ओर लौटती है या ऐसे ही अनोखे तरीके अपनाती रहेगी।
