देश के दिग्गज मीडिया हाउस Zee Entertainment, Sony और JioStar ने सरकार से ब्रॉडकास्टिंग और रेटिंग सिस्टम में बड़े बदलावों की मांग की है। इंडस्ट्री का कहना है कि मौजूदा नियमों और प्राइसिंग कैप्स के कारण उनके एडवरटाइजिंग रेवेन्यू पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे निवेशक भी चिंता में हैं।
हाल ही में FICCI Frames इवेंट के दौरान भारतीय मीडिया जगत के दिग्गजों ने सरकार के सामने अपनी बात मजबूती से रखी है। Zee Entertainment, Sony Pictures Networks India और JioStar के टॉप लीडर्स का मानना है कि ब्रॉडकास्टिंग के मौजूदा नियम काफी पुराने हो चुके हैं और ये कंपनी की ग्रोथ में बाधा डाल रहे हैं।
रेटिंग सिस्टम पर संकट
ब्रॉडकास्टर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती 'Broadcast Audience Research Council' (BARC) के आंकड़ों की विश्वसनीयता है। जब रेटिंग्स में निरंतरता नहीं होती, तो विज्ञापनदाता (Advertisers) पैसा खर्च करने से कतराते हैं। यह समस्या त्योहारों के सीजन में सबसे ज्यादा चुभती है, क्योंकि इसी दौरान मीडिया कंपनियां अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा जुटाती हैं।
NTO और प्राइसिंग कैप की मार
इंडस्ट्री के दिग्गज Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) द्वारा लाए गए 'New Tariff Order' (NTO) से काफी नाराज हैं। प्राइसिंग कैप्स (Pricing Caps) के कारण ब्रॉडकास्टर्स अपनी मर्जी से चैनल की कीमतें तय नहीं कर पा रहे हैं, जिससे रेवेन्यू पर एक 'सीलिंग' लग गई है। वहीं, दूसरी ओर डिजिटल और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता के चलते पारंपरिक टीवी बिजनेस के लिए प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।
क्या है आगे की राह?
हालांकि मिनिस्ट्री ऑफ इंफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग के 10+2 एडवरटाइजिंग टाइम कैप को हटाने के फैसले का इंडस्ट्री ने स्वागत किया है, लेकिन लीडर्स का मानना है कि यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या सरकार इन कंपनियों की मांग मानती है या नहीं। आने वाले समय में इन मीडिया कंपनियों के क्वार्टरली नतीजों और मैनेजमेंट की कमेंट्री पर मार्केट का पूरा फोकस रहने वाला है।
