Zee Entertainment के शेयरों में सोमवार को 14% से ज्यादा की बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसकी मुख्य वजह एक विवादित कर्ज निपटान है, जिसमें NCLT के फैसले को बड़े बैंकों ने चुनौती देने का फैसला किया है।
सोमवार, 31 अगस्त 2026 को Zee Entertainment Enterprises के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। इंट्राडे ट्रेड के दौरान स्टॉक 14% गिरकर ₹87 के निचले स्तर तक पहुंच गया। यह गिरावट तब आई जब केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस जैसे प्रमुख लेनदारों ने एस्सेल ग्रुप के कर्ज समाधान पर आए हालिया अदालती फैसले को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी।
विवाद की जड़ क्या है?
यह पूरा मामला 25 अगस्त 2026 के NCLT के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें एस्सेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा द्वारा पेश की गई रीपेमेंट योजना को मंजूरी दी गई थी। इस योजना के तहत ₹22,006.57 करोड़ के कुल दावों को महज ₹6.5 करोड़ में निपटाने की अनुमति दी गई थी। करीब 99.97% के इस भारी 'हेयरकट' (कर्ज माफी) से निवेशकों में कंपनी के गवर्नेंस और रिकवरी प्रोसेस को लेकर गहरी चिंता पैदा हो गई है।
आगे क्या होगा?
लेनदार अब इस फैसले के खिलाफ NCLAT (National Company Law Appellate Tribunal) का रुख कर रहे हैं। कानूनी अनिश्चितता के कारण निवेशकों के लिए रिस्क बढ़ गया है, क्योंकि अपील का नतीजा ही तय करेगा कि कर्ज निपटान की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा या नहीं।
सेक्टर पर असर
इस खबर से निफ्टी मीडिया इंडेक्स भी प्रभावित हुआ और इसमें 4.5% की गिरावट दर्ज की गई। मीडिया सेक्टर पहले ही विज्ञापन खर्चों में बदलाव (shift in advertising trends) से दबाव में है। एफएमसीजी (FMCG) कंपनियां अब अपने बजट को पारंपरिक टेलीविजन के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की ओर मोड़ रही हैं, जिससे पारंपरिक मीडिया कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
