Zee Entertainment की 44वीं AGM में शेयरधारकों ने पांच डायरेक्टर्स की दोबारा नियुक्ति और **₹2** प्रति शेयर डिविडेंड को मंजूरी दे दी है। कंपनी अब अपने पुराने ढर्रे को छोड़कर डिजिटल इकोसिस्टम और माइक्रो-ड्रामा जैसे नए फॉर्मेट्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
बोर्ड पर निवेशकों का भरोसा
कंपनी की 44वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के तौर पर दीपनी बंसल, उत्तम प्रकाश अग्रवाल, पी.वी. रमना मूर्ति और शिशिर बाबूभाई देसाई, तथा नॉन-एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में सौरभ अधिकारी की पुनः नियुक्ति को हरी झंडी मिल गई है। मीडिया सेक्टर में जारी उतार-चढ़ाव के बीच, कंपनी ने ₹2 प्रति शेयर के डिविडेंड का भी ऐलान किया है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब कंपनी Sony Pictures Networks India के साथ प्रस्तावित मर्जर के विफल होने और रेगुलेटरी चुनौतियों से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है।
डिजिटल की ओर बड़ा बदलाव
CEO पुनीत गोयनका के नेतृत्व में Zee अब पारंपरिक टीवी ब्रॉडकास्टिंग से हटकर एक टेक-पावर्ड डिजिटल इकोसिस्टम बनाने की ओर बढ़ रही है। कंपनी का मकसद एक 'सेंट्रल इंटेलिजेंस वेयरहाउस' तैयार करना है ताकि पारदर्शिता बढ़े और बिजनेस परफॉर्मेंस की बेहतर ट्रैकिंग हो सके।
रेवेन्यू बढ़ाने के नए दांव
रेवेन्यू सोर्सेज में विविधता लाने के लिए कंपनी ने कई बड़े कदम उठाए हैं:
- कंटेंट में बदलाव: कंपनी माइक्रो-ड्रामा, बच्चों के प्रोग्राम और लाइव एंटरटेनमेंट पर जोर दे रही है।
- रणनीतिक पार्टनरशिप: एनीमेशन और VFX स्टूडियो 'PhantomFX' के साथ साझेदारी की गई है ताकि कंपनी की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को मजबूत किया जा सके।
- स्पोर्ट्स का तड़का: बुंडेसलीगा (Bundesliga) और सीरी ए (Serie A) जैसी लीग्स के अधिकारों के जरिए एक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करने की तैयारी है।
हालांकि, ग्लोबल और डोमेस्टिक OTT प्लेटफॉर्म्स से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और विज्ञापन से होने वाली स्टैग्नेंट (स्थिर) कमाई मीडिया जगत के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि Zee का यह डिजिटल-फर्स्ट मॉडल लागत को नियंत्रित करते हुए प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे बनाए रखता है।
