Zee Entertainment Enterprises ने स्पष्ट किया है कि उनके फाउंडर सुभाष चंद्रा के खिलाफ चल रही CBI जांच से कंपनी का कोई लेना-देना नहीं है। यह मामला प्रमोटर स्तर पर **₹1,322 करोड़** के लोन विवाद से जुड़ा है।
Zee Entertainment ने एक औपचारिक बयान जारी कर साफ किया है कि मीडिया दिग्गज कंपनी के तौर पर उसका इस कानूनी मामले से कोई संबंध नहीं है। कंपनी का कहना है कि CBI की यह जांच पूरी तरह से उनके फाउंडर और उनसे जुड़ी संस्थाओं तक सीमित है, न कि कंपनी के मैनेजमेंट या उसके ऑपरेशनल एसेट्स से। यह पूरा विवाद LIC Housing Finance की एक शिकायत के बाद शुरू हुआ है, जिसमें ₹1,322 करोड़ की क्रेडिट फैसिलिटी में हेराफेरी का आरोप है।\n\nजांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या चंद्रा ने एसेल ग्रुप (Essel Group) से जुड़ी कंपनियों के लिए लोन लेते समय अपनी नेटवर्थ को गलत तरीके से पेश किया था। अधिकारियों द्वारा क्रिमिनल कॉन्स्पिरसी और विश्वासघात के आरोपों की जांच की जा रही है।\n\n### कमजोर होते फाइनेंशियल नतीजे\n\nएक तरफ कानूनी पचड़े हैं, तो दूसरी तरफ कंपनी का बिजनेस भी दबाव में दिख रहा है। 30 सितंबर, 2026 को समाप्त हुई तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 40% गिर गया है। बढ़ते प्रमोशनल खर्चों के कारण EBITDA मार्जिन भी सिमटकर महज 3.2% रह गया है।\n\n### निवेशकों के लिए जोखिम\n\nशेयरहोल्डर्स की सबसे बड़ी चिंता गवर्नेंस को लेकर है। SEBI द्वारा पूर्व में फाउंडर और मुख्य लीडरशिप पर लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से निवेशक पहले ही सतर्क रहे हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या इन कानूनी विवादों के बावजूद मैनेजमेंट अपने ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को सुधार पाएगा या प्रमोटर-स्तर की ये दिक्कतें कंपनी की कार्यक्षमता को प्रभावित करती रहेंगी।
