पश्चिम बंगाल में 2026 की दुर्गा पूजा बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। नई सरकार के तहत रेड रोड कार्निवल रद्द कर दिया गया है, आयोजकों पर ED की जांच चल रही है और Adani Group जैसे बड़े कॉर्पोरेट खिलाड़ी प्रायोजन (Sponsorship) की दुनिया में उतर आए हैं।
मई 2026 में सत्ता परिवर्तन के बाद से दुर्गा पूजा के आयोजन में प्रशासनिक और परिचालन स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। पिछले प्रशासन की पहचान रहे 'रेड रोड कार्निवल' को अब बंद कर दिया गया है। इसकी जगह अब 10 अक्टूबर को ईडन गार्डन्स में एक नया 'महालया' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है। यह राज्य की राजनीति में आए बड़े बदलाव का ही संकेत है।
वित्तीय जांच और रेगुलेटरी रिस्क
त्योहार, जो राज्य के लिए एक विशाल आर्थिक इंजन की तरह है, अब सख्त रेगुलेटरी निगरानी में है। सितंबर के अंत में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फेस्टिवल प्रीव्यू शो से जुड़ी संस्था 'MassArt' के 15 ठिकानों पर छापेमारी की। यह जांच कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर की जा रही है। इस सख्ती ने कलाकारों, डेकोरेटर्स और उन वेंडर्स के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिनकी आजीविका इस फेस्टिवल पर टिकी है।
बदलती कॉर्पोरेट प्रायोजन की गतिशीलता
रेगुलेटरी बदलावों के साथ-साथ पूजा का कमर्शियल लैंडस्केप भी बदल रहा है। Adani Group ने आधिकारिक तौर पर पूजा इकोसिस्टम में कदम रखा है और 8 चुनिंदा पंडालों के लिए 'दुर्गा पूजा अदानी प्रीव्यू' (DPAP) 2026 लॉन्च किया है। यह कॉर्पोरेट पैट्रनेज में एक बड़ा बदलाव है, जो अब तक स्थानीय व्यवसायों और राज्य-समर्थित प्रायोजकों पर निर्भर था। बड़े कॉर्पोरेट्स की एंट्री से फंडिंग और आयोजन के तरीकों में बड़ा कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है।
सांस्कृतिक और सामाजिक तनाव
त्योहार के दौरान पंडालों की थीम और सार्वजनिक प्रस्तुति को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है। नई प्रशासनिक व्यवस्था के तहत समितियों पर शाकाहार को बढ़ावा देने और सजावट के लिए खास दिशानिर्देशों का पालन करने का दबाव है। आयोजकों को अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता खोने का डर सता रहा है। फिलहाल, सभी की नजरें ED की जांच के नतीजों और इस नए प्रायोजन मॉडल के स्थानीय कारीगरों पर पड़ने वाले असर पर टिकी हैं।
