Varun Dhawan Privacy Ruling: AI के दुरुपयोग पर कोर्ट का बड़ा फैसला, डीपफेक पर कसेगा शिकंजा!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Varun Dhawan Privacy Ruling: AI के दुरुपयोग पर कोर्ट का बड़ा फैसला, डीपफेक पर कसेगा शिकंजा!
Overview

एक्टर Varun Dhawan के लिए दिल्ली हाईकोर्ट से एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। कोर्ट ने AI से जुड़े डीपफेक (Deepfake) और उनकी इमेज के गलत इस्तेमाल के खिलाफ एक बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले के तहत, अब किसी भी व्यक्ति की अनुमति के बिना उनकी AI-जनरेटेड इमेज या डीपफेक का इस्तेमाल करना गैर-कानूनी होगा।

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डिजिटल पर्सनैलिटी राइट्स में बड़ा बदलाव

Varun Dhawan से जुड़े इस मामले में कोर्ट का फैसला जेनरेटिव AI (Generative AI) और किसी व्यक्ति के प्रचार अधिकारों (Publicity Rights) के बीच के रिश्ते को लेकर एक अहम मोड़ है। कोर्ट ने न सिर्फ डीपफेक, बल्कि अनधिकृत मर्चेंडाइज या इवेंट बुकिंग में भी सेलिब्रिटी की इमेज के गलत इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। अब ग्लोबल टेक प्लेटफॉर्म्स को ऐसे मामलों में 36 घंटे के अंदर कंटेंट हटाना होगा। साथ ही, गलत इस्तेमाल करने वाले अकाउंट्स की जानकारी भी देनी होगी, जिससे ऐसे लोग बेनकाब होंगे जो AI का इस्तेमाल करके सेलिब्रिटी की इमेज से पैसे कमा रहे हैं।

प्रवर्तन की नई राह

पहले के फैसलों के विपरीत, जहां केवल ट्रेडमार्क के उल्लंघन पर ध्यान दिया जाता था, इस फैसले में एक मजबूत प्रवर्तन तंत्र (Enforcement Mechanism) तैयार किया गया है। सोशल मीडिया कंपनियों पर अब 36 घंटे की समय सीमा के भीतर सिंथेटिक कंटेंट को हटाने का दबाव होगा, और ऐसा न करने पर वे बढ़ी हुई देनदारी के दायरे में आएंगी। यह फैसला बॉलीवुड के कई बड़े सितारों, जैसे Amitabh Bachchan और Anil Kapoor के लिए पहले मांगी गई सुरक्षा के अनुरूप है। हालांकि, Dhawan का मामला विशेष रूप से डीपफेक और ऑनलाइन रिटेल के दुरुपयोग पर केंद्रित है, जहां एक्टर के नाम का इस्तेमाल धोखाधड़ी वाली बिक्री के लिए किया जा रहा था।

बौद्धिक संपदा का बढ़ता दायरा

यह फैसला तत्काल राहत तो देता है, लेकिन पर्सनैलिटी राइट्स के दायरे पर सवाल खड़े करता है। कानूनी और टेक पॉलिसी एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी व्यक्ति की 'लाइकनेस' (Likeness) के इस्तेमाल पर व्यापक प्रतिबंध वैध व्यंग्य, पैरोडी या कलात्मक टिप्पणी को भी बाधित कर सकता है। जैसे-जैसे कोर्ट व्यक्तिगत विशेषताओं को मालिकाना ट्रेडमार्क मानने लगा है, Google और Meta जैसे प्लेटफॉर्म के लिए यह चुनौती होगी कि वे असली पैरोडी और दुर्भावनापूर्ण डीपफेक के बीच अंतर कैसे करें। इससे यह भी आशंका है कि प्लेटफॉर्म्स, तय समय-सीमा से बचने के लिए, अधिक से अधिक कंटेंट को सेंसर कर सकते हैं।

सेलिब्रिटी डेटा प्राइवेसी का भविष्य

मार्केट पार्टिसिपेंट्स को डिजिटल मार्केटिंग और AI डेवलपमेंट सेक्टर पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव पर नजर रखनी चाहिए। जैसे-जैसे पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर मुकदमेबाजी बढ़ेगी, अधिकृत डिजिटल इमेज या एंडोर्समेंट हासिल करने की लागत बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म्स द्वारा बेसिक सब्सक्राइबर जानकारी का अनिवार्य खुलासा यह दर्शाता है कि न्यायपालिका ऑनलाइन सामग्री की मेजबानी करने वालों के लिए सख्त जवाबदेही की ओर बढ़ रही है। इससे यह भी साफ है कि सार्वजनिक हस्तियों की डिजिटल पहचान की निगरानी का बोझ टेक कंपनियों पर ही रहेगा, जिसके लिए उन्हें अधिक उन्नत ऑटोमेटेड डिटेक्शन टूल्स की आवश्यकता होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.