Universal Music India: अब नए गाने 72 घंटे 'पेड' यूजर्स के लिए होंगे एक्सक्लूसिव!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Universal Music India: अब नए गाने 72 घंटे 'पेड' यूजर्स के लिए होंगे एक्सक्लूसिव!

Universal Music Group (UMG) भारत में अपने संगीत वितरण के तरीके में बड़ा बदलाव ला रहा है। अब से, नए टॉप-टियर गाने रिलीज होने के पहले **72 घंटे** केवल 'पेड' स्ट्रीमिंग सब्सक्राइबर ही सुन पाएंगे। इस कदम का लक्ष्य भारत में ad-supported यूजर बेस को पेड सब्सक्राइबर में बदलना है।

भारत में म्यूजिक स्ट्रीमिंग को बूस्ट करने की तैयारी

UMG का कहना है कि इस नई रणनीति के जरिए वह भारत को दुनिया के 15वें सबसे बड़े म्यूजिक मार्केट से आगे ले जाना चाहता है। भारत में हर साल करीब 1 ट्रिलियन गाने सुने जाते हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर ad-supported मॉडल पर हैं, जिनसे कमाई पेड सब्सक्रिप्शन के मुकाबले काफी कम होती है। पहले 72 घंटों का प्रीमियम एक्सेस देकर कंपनी ज्यादा से ज्यादा श्रोताओं को अपने अकाउंट अपग्रेड करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है, जिससे प्रति यूजर कमाई (ARPU) बढ़ेगी। यह इंडस्ट्री में कंटेंट के जरिए सब्सक्रिप्शन बढ़ाने का एक नया ट्रेंड है।

चीन से सीखा सबक

UMG को इस मॉडल पर भरोसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने 2019 में चीन में भी ऐसा ही 'पे-वॉल' (Paywall) सिस्टम लागू किया था। शुरुआत में भले ही पहुंच कम होने की चिंता थी, लेकिन कंपनी ने दावा किया कि इससे पेड सब्सक्रिप्शन और 'सुपरफैन' मोनिटाइजेशन में जबरदस्त ग्रोथ हुई। 2025 तक चीन का रिकॉर्डेड म्यूजिक मार्केट दुनिया का चौथा सबसे बड़ा मार्केट बन गया था। हालांकि, भारत का मार्केट चीन से अलग है, जहां कंज्यूमर कीमत के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं।

क्या हैं मार्केट के रिस्क?

इस पहल की सफलता की गारंटी नहीं है और इसमें कई बिजनेस रिस्क हैं। एक बड़ी चिंता यह है कि भारतीय यूजर इस 'रिस्ट्रिक्टेड एक्सेस' पर कैसी प्रतिक्रिया देंगे। अगर लोग पैसे देने को तैयार नहीं हुए, तो यह रणनीति श्रोताओं को अनधिकृत प्लेटफॉर्म या पाइरेसी की ओर धकेल सकती है, जिससे आर्टिस्ट की रीच और एंगेजमेंट कम हो सकती है। इसके अलावा, UMG को भारत में काम कर रहे सभी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ तालमेल बिठाना होगा। कंपनी का भारत में भविष्य का रेवेन्यू ग्रोथ इसी पर निर्भर करेगा कि वह अपने एक्टिव मंथली यूजर्स को खोए बिना इस बदलाव को कैसे लागू करती है। इन्वेस्टर्स को भविष्य की अर्निंग रिपोर्ट्स पर नजर रखनी होगी ताकि पेड कन्वर्जन रेट्स और इस 72-घंटे की विंडो पॉलिसी में किसी भी बदलाव की जानकारी मिल सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.