ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) और सरकार के बीच चल रहे गतिरोध के कारण टीवी रेटिंग रुकी हुई है, जिससे फेस्टिव सीजन से पहले मीडिया कंपनियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विज्ञापनदाता डेटा के अभाव में अपना बजट खर्च करने से कतरा रहे हैं।
भारत के टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में इस समय भारी अनिश्चितता बनी हुई है। मिनिस्ट्री ऑफ इंफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग और BARC के बीच जारी गतिरोध ने मीडिया कंपनियों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। मार्च 2026 से टीवी न्यूज़ रेटिंग्स उपलब्ध न होने के कारण कंपनियां विज्ञापनदाताओं को व्यूअरशिप का सटीक डेटा नहीं दे पा रही हैं, जिसका सीधा असर फेस्टिव सीजन के बड़े कैंपेन पर पड़ रहा है।
सरकार के सख्त मानक
यह विवाद सरकार के नए मानकों को लागू करने की जिद के कारण पैदा हुआ है। BARC को अब क्रॉस-स्क्रीन मेजरमेंट और लैंडिंग-पेज डेटा को हटाने जैसे पारदर्शी नियम अपनाने होंगे। इन बदलावों के लिए BARC अपने पांचवें इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में मुरलीधरन रामचंद्रन की नियुक्ति कर रहा है। साथ ही, साल के अंत तक 80,000 घरों तक पैनल साइज बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
निवेशकों की चिंता और कंपनियों का हाल
Zee Entertainment Enterprises और JioStar जैसी बड़ी कंपनियों का मानना है कि भरोसेमंद डेटा की कमी एक बड़ा 'बॉटलनेक' बन गई है। जब तक पुख्ता डेटा नहीं मिलता, मीडिया प्लानर्स सतर्क रहेंगे, जिससे विज्ञापन ग्रोथ पर ब्रेक लग सकता है। इसके अलावा, TAM India और Chrome DM जैसी प्रतिद्वंद्वी एजेंसियों के आने से डेटा के बिखरने (Data Fragmentation) का खतरा भी बढ़ गया है।
फाइनेंशियल स्थिति
वित्तीय रूप से BARC अभी भी मजबूत स्थिति में है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में कंपनी ने ₹16 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। हालांकि, बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार से मंजूरी मिलने के बाद रेटिंग रिपोर्टिंग कब से पूरी तरह शुरू होगी, क्योंकि यही निवेशकों का भरोसा बहाल करने की चाबी है।
