TRAI ने ऐप-आधारित लीनियर टीवी डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) के लिए एक औपचारिक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क जारी किया है। कम लागत और जीरो रिकरिंग चार्ज वाले इस कदम से 'FAST' चैनल्स को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पारंपरिक केबल और DTH कंपनियों पर असर पड़ सकता है।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 'टेलीकम्यूनिकेशन एक्ट, 2023' के तहत ऐप-आधारित लीनियर टीवी डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) सेवाओं के लिए एक स्पष्ट नियम बना दिए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य FAST (फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन) चैनल्स को एक कानूनी ढांचा देना है, ताकि ये डिजिटल प्लेटफॉर्म पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग मॉडल को टक्कर दे सकें।
कम लागत, बड़ा बदलाव
नए फ्रेमवर्क के तहत डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए एंट्री बहुत आसान कर दी गई है। अब सिर्फ ₹10,000 की आवेदन फीस और ₹1 लाख की एकमुश्त एंट्री फीस देनी होगी। सबसे राहत की बात यह है कि पारंपरिक केबल और DTH ऑपरेटरों पर लगने वाले भारी-भरकम ऑथराइजेशन फीस, बैंक गारंटी और सिक्योरिटी डिपॉजिट का बोझ यहाँ नहीं होगा। साथ ही, 20 साल की लाइसेंस अवधि से कंपनियों को लॉन्ग-टर्म प्लानिंग में आसानी होगी।
ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर पर क्या असर होगा?
यह फैसला भारतीय मीडिया जगत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। लंबे समय से केबल और DTH ऑपरेटर OTT के दबाव में हैं, और अब FAST चैनल्स के आने से 'कॉर्ड-कटिंग' (केबल कनेक्शन छोड़ना) का ट्रेंड और तेज हो सकता है। जो कंपनियां मजबूत कंटेंट लाइब्रेरी रखती हैं, वे अब सीधे विज्ञापनों (Ad revenue) का बड़ा हिस्सा हथियाने में सक्षम होंगी, जो पहले केवल पारंपरिक टीवी तक सीमित था।
सरकार की नजर और नियम
हालांकि एंट्री आसान है, लेकिन कंटेंट पर नजर सख्त रहेगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) एक 'मास्टर ALTD ऐप रिपॉजिटरी' बनाएगा। स्मार्ट टीवी बनाने वाले OEMs के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे केवल अधिकृत स्ट्रीमिंग ऐप्स को ही अपने प्लेटफॉर्म पर जगह दें। OEMs को इसके लिए सालाना अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) भी देनी होगी।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनियां इस नए फॉर्मेट से पैसा कैसे बनाती हैं। नियामक बाधाएं कम होने के बावजूद, कंटेंट की लागत और विज्ञापन जुटाने की क्षमता ही मुनाफे का आधार होगी। भविष्य में ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों के नतीजों में एडवर्टाइजिंग बजट का ट्रेडिशनल टीवी से डिजिटल-लीनियर मॉडल की तरफ शिफ्ट होना एक अहम पैमाना (Metric) होगा।
