Zee के फाउंडर Subhash Chandra ने सोशल मीडिया दिग्गज कंपनियों को लीगल नोटिस भेजकर उनकी निजी इनसॉल्वेंसी स्थिति से जुड़ी गलत जानकारी हटाने की मांग की है। वह खुद को **₹22,006 करोड़** के कर्ज से जोड़ने वाली खबरों को गलत बता रहे हैं।
Zee Entertainment Enterprises के फाउंडर Subhash Chandra ने Meta, YouTube, X और LinkedIn के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इन कंपनियों को एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है कि वे अगस्त-सितंबर 2026 की उन खबरों को हटा दें, जिन्हें वे अपनी छवि खराब करने वाला बता रहे हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो वे मानहानि का मुकदमा (Defamation Suit) दायर करेंगे।
कर्ज विवाद की असलियत
विवाद की मुख्य जड़ ₹22,006 करोड़ का वह कर्ज आंकड़ा है, जिसे लेकर मार्केट में चर्चाएं गर्म हैं। Subhash Chandra का कहना है कि उनका व्यक्तिगत कर्ज शून्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल एक 'पर्सनल गारंटर' (Personal Guarantor) थे। उनके ऑफिस के मुताबिक, उनका रिपेमेंट प्लान मात्र ₹6.5 करोड़ का है, जिसमें प्रशासनिक खर्च भी शामिल हैं। उनका तर्क है कि मुख्य उधारकर्ता के कुल कर्ज को उनके नाम से जोड़ना पूरी तरह गलत है।
NCLT और CBI की मुश्किलें
मामला सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं है। 1 सितंबर 2026 को NCLT की पांच सदस्यीय बेंच ने उनके रिपेमेंट प्लान पर रोक लगा दी है। साथ ही, कोर्ट ने उन्हें अपनी संपत्ति को ट्रांसफर या बेचने से भी रोक दिया है। इसके अलावा, उन पर ₹1,322 करोड़ के कथित फ्रॉड को लेकर CBI जांच का भी दबाव है, जिसमें LIC Housing Finance का नाम सामने आया है।
निवेशकों पर असर
इन तमाम कानूनी पेचीदगियों के चलते Zee Entertainment के शेयरों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। हाल ही में शेयर में करीब 14% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। फिलहाल, निवेशकों की नजर NCLT की अगली सुनवाई और CBI जांच की रिपोर्ट पर टिकी है, जो कंपनी और प्रमोटर के भविष्य के लिए काफी अहम साबित होगी।
