Streaming Giants: IPL के बाद अब इन खेलों पर दांव, क्या मुनाफे का रास्ता साफ?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Streaming Giants: IPL के बाद अब इन खेलों पर दांव, क्या मुनाफे का रास्ता साफ?

भारत की स्ट्रीमिंग कंपनियां अब कबड्डी और फुटबॉल जैसे खेलों पर फोकस बढ़ा रही हैं। क्रिकेट की मौसमी निर्भरता को खत्म करने और सब्सक्राइबर्स को साल भर जोड़े रखने के लिए 'बंडलिंग' की रणनीति अपनाई जा रही है।

भारत में स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स एक बड़ी चुनौती से जूझ रहे हैं—क्रिकेट की सीजनैलिटी। भले ही क्रिकेट देश के कुल स्पोर्ट्स एडवर्टाइजिंग स्पेंड का 90% हिस्सा बटोर लेता है, लेकिन यह साल भर चलने वाला कंटेंट नहीं है। यही कारण है कि अब कंपनियां प्रो कबड्डी लीग (Pro Kabaddi League), फुटबॉल लीग और टेनिस ग्रैंड स्लैम जैसे 'निश स्पोर्ट्स' (Niche Sports) को अपने पोर्टफोलियो में जोड़ रही हैं।

नई बिजनेस स्ट्रैटेजी

कंपनियों का लक्ष्य अब हर टूर्नामेंट से अलग मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि सब्सक्राइबर्स को पूरे साल प्लेटफॉर्म पर बनाए रखना है। इसे 'बंडलिंग मॉडल' कहा जा रहा है, जहां स्पोर्ट्स को मनोरंजन के साथ जोड़कर सब्सक्राइबर्स की लाइफटाइम वैल्यू बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

रिस्क और चुनौतियां

हालांकि, राह इतनी आसान नहीं है। इन खेलों से क्रिकेट जैसी विज्ञापन कमाई (Ad Yield) नहीं होती, जबकि इनके मीडिया राइट्स बहुत महंगे हैं। अगर सब्सक्रिप्शन से आने वाली कमाई इन खर्चों को कवर नहीं कर पाती, तो कंपनियों के मार्जिन पर भारी दबाव आ सकता है। इसके अलावा, पायरेसी और बढ़ती महंगाई के बीच सब्सक्राइबर्स का प्लेटफॉर्म छोड़ने का डर (Churn) बना हुआ है।

कंसोलिडेशन का दौर

JioHotstar जैसे बड़े मर्जर का उद्देश्य भी यही है कि स्केल बढ़ाकर भारी-भरकम खर्चों को झेला जाए। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि कंपनियां क्या इन स्पोर्ट्स दर्शकों को फिल्मों और ओरिजिनल सीरीज जैसे अधिक मार्जिन वाले कंटेंट की ओर ले जाने में सफल होती हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.