Siti Networks ने अपने ऑडिट किए गए FY25 के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं, जो कंपनी की गंभीर वित्तीय हालत को दर्शाते हैं। इस फाइनेंशियल ईयर में कंपनी को ₹1,954.06 मिलियन का नेट लॉस हुआ है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में काफी गिरकर ₹3,563.42 मिलियन पर आ गया है।
इन नतीजों के साथ ही एक और बड़ी समस्या सामने आई है। कंपनी कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के अधीन है, जिसकी वजह से वे अपनी एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) आयोजित नहीं कर पा रहे हैं। रेगुलेटरी अथॉरिटीज ने CIRP स्टेटस का हवाला देते हुए AGM की मंजूरी देने से इनकार कर दिया है, जिससे कंपनी के गवर्नेंस पर सवाल उठ रहे हैं।
आपको बता दें कि Siti Networks फरवरी 2023 से ही नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के तहत CIRP प्रक्रिया से गुजर रही है। इस प्रक्रिया में, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का निलंबन हो जाता है और सारी शक्तियां रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) के पास चली जाती हैं। यह स्थिति कंपनी के लिए बड़े ऑपरेशनल और कानूनी झंझट पैदा कर रही है।
पिछले रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी पर फाइनेंशियल क्रेडिटर्स का ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा का बकाया है। कंपनी के ऑडिटर्स ने भी अनिश्चितताओं के कारण अपनी रिपोर्ट पर डिस्क्लेम्ड ओपिनियन (Disclaimed Opinion) जारी किया है, जो कंपनी की वित्तीय स्थिति की अस्थिरता को दिखाता है।
CIRP के तहत, शेयरधारकों का कंपनी पर नियंत्रण लगभग खत्म हो गया है। अब सारा ध्यान CIRP प्रक्रिया के नतीजे पर है। यह प्रक्रिया तय करेगी कि कंपनी का भविष्य क्या होगा - क्या कोई समाधान योजना (Resolution Plan) सफल होगी या फिर कंपनी लिक्विडेशन (Liquidation) की ओर बढ़ेगी।
आगे चलकर मुख्य जोखिम CIRP का नतीजा ही है। यदि कोई व्यवहार्य समाधान योजना स्वीकृत नहीं हो पाती है, तो कंपनी लिक्विडेशन की कगार पर पहुंच सकती है। इसके अलावा, लगातार डिफॉल्ट, कानूनी चुनौतियां और अनुपालन में विफलता कंपनी की मौजूदा नाजुक स्थिति को और बिगाड़ सकती है।
FY25 के अंत तक (31 मार्च 2025), कंपनी की नेट वर्थ नकारात्मक ₹12,942.98 मिलियन थी। पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY24) में कंपनी ने ₹1,839.63 मिलियन का नेट लॉस झेला था, जबकि रेवेन्यू ₹12,910.91 मिलियन था। FY25 में रेवेन्यू में भारी गिरावट देखी गई है।
निवेशकों को अब CIRP प्रक्रिया की प्रगति और समय-सीमा पर बारीकी से नज़र रखनी होगी। समाधान योजनाओं या संभावित लिक्विडेशन से जुड़ी किसी भी खबर पर ध्यान देना होगा। साथ ही, कंपनी के रेगुलेटरी फाइलिंग्स और कानूनी मामलों पर भी नज़र बनाए रखनी चाहिए।