📉 चिंताजनक हालात: SAB Events का भविष्य अधर में!
SAB Events & Governance Now Media Limited की वित्तीय रिपोर्ट ने निवेशकों को हिलाकर रख दिया है। कंपनी की गोइंग कंसर्न (going concern) स्थिति पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, क्योंकि कंपनी दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (insolvency resolution process) में फंस गई है। ऑडिट रिपोर्ट भी क्वालिफाई (qualified) की गई है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है।
तिमाही के आंकड़े क्या कहते हैं?
कंपनी के तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजों के अनुसार, SAB Events ने ₹44.34 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) के ₹43.92 करोड़ की तुलना में मामूली 0.96% की बढ़ोतरी है। हालांकि, यह पिछली तिमाही (Q2 FY26) के ₹55.25 करोड़ से 19.7% कम है। इस तिमाही में कुल आय (Total Income) ₹87.93 करोड़ रही, जिसमें ₹43.59 करोड़ का 'अन्य आय' (Other Income) शामिल है। वहीं, कंपनी के खर्चे 15.4% बढ़कर ₹74.81 करोड़ पर पहुँच गए। इन सब का नतीजा यह हुआ कि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 34.6% की भारी गिरावट आई, और यह ₹20.05 करोड़ से घटकर ₹13.12 करोड़ रह गया। कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS) भी 31.6% गिरकर ₹0.13 हो गई, जो पिछले साल ₹0.19 थी।
वहीं, नौ महीनों (9MFY26) के आंकड़े देखें तो कंपनी ने अपना नेट लॉस घटाकर (₹25.19) करोड़ कर लिया है, जो पिछले साल इसी अवधि में (₹43.64) करोड़ था। इस दौरान रेवेन्यू में 20.0% की अच्छी बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹140.27 करोड़ पर पहुँच गया।
बैलेंस शीट पर बड़ा सवाल और ऑडिटर्स की चिंता
कंपनी की बैलेंस शीट की सेहत बेहद कमजोर है। डायरेक्ट खर्चे (direct expenses) 133.4% उछलकर ₹12.19 करोड़ हो गए, जो लागत दबाव या संचालन में कमी का संकेत दे सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता कंपनी की लिक्विडिटी (liquidity) को लेकर है, जहां मौजूदा देनदारियां (current liabilities) मौजूदा संपत्तियों (current assets) की तुलना में 3.74 गुना ज्यादा हैं। ऑडिटर्स की रिपोर्ट में नेगेटिव टोटल इक्विटी (negative total equity) का साफ जिक्र है। कंपनी पर कर्ज चुकाने और अपने परिचालन से कैश फ्लो (cash flow) उत्पन्न करने की क्षमता नहीं है।
सबसे गंभीर बात यह है कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 4 नवंबर, 2025 को कंपनी के खिलाफ दिवालियापन समाधान के लिए याचिका स्वीकार कर ली है। क्वालिफाई की गई ऑडिट रिपोर्ट भी इस स्थिति को और गंभीर बनाती है।
आगे का रास्ता और निवेशक के लिए खतरा
फिलहाल, कंपनी के सामने सबसे बड़ा खतरा दिवालियापन की चल रही प्रक्रिया है, जो इसके संचालन पर संदेह पैदा करती है। गोइंग कंसर्न (going concern) की अनिश्चितता का मतलब है कि वित्तीय विवरण इस अनुमान पर तैयार किए गए हैं कि कंपनी शायद जारी न रह पाए। नेगेटिव इक्विटी और गंभीर लिक्विडिटी की कमी को देखते हुए, कंपनी का भविष्य बेहद अनिश्चित है। कंपनी का भविष्य पूरी तरह से IBC कार्यवाही के नतीजों और पर्याप्त लॉन्ग-टर्म फंडिंग जुटाने की उसकी क्षमता पर निर्भर करेगा, जो इस संकटग्रस्त वित्तीय स्थिति को देखते हुए असंभव लगता है। निवेशकों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।