📉 नतीजों का पूरा विश्लेषण
S Chand & Company Limited के 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुए क्वार्टर के अनऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स (unaudited financial results) बताते हैं कि कंपनी की मुश्किलें बढ़ रही हैं। स्टैंडअलोन (standalone) लेवल पर, कंपनी के ऑपरेशन से होने वाले रेवेन्यू (revenue) में पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 34.37% की भारी गिरावट आई है, जो ₹331.41 मिलियन से घटकर ₹217.44 मिलियन रह गया। इस रेवेन्यू की कमी के चलते नेट लॉस (net loss) भी ₹137.71 मिलियन से बढ़कर ₹172.94 मिलियन हो गया। इसी के साथ, बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (EPS) भी (₹3.91) से गिरकर (₹4.90) पर आ गया।
कंसॉलिडेटेड (consolidated) लेवल पर प्रदर्शन मिला-जुला रहा, लेकिन चिंताएं बनी हुई हैं। Q3 FY26 में कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में 1.20% की मामूली गिरावट आई और यह ₹989.53 मिलियन रहा। वहीं, कुल खर्च 11.73% बढ़कर ₹1,450.45 मिलियन हो गया। इस वजह से, क्वार्टर का नेट लॉस बढ़कर ₹286.98 मिलियन तक पहुंच गया, जो पिछले साल ₹255.72 मिलियन था। कंसॉलिडेटेड ईपीएस भी (₹6.99) से गिरकर (₹7.90) हो गया।
चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले नौ महीनों (nine months) में भी यही ट्रेंड जारी रहा। स्टैंडअलोन रेवेन्यू 22.71% गिरकर ₹871.81 मिलियन रहा और नेट लॉस बढ़कर ₹339.84 मिलियन हो गया, जो पिछले साल ₹192.76 मिलियन था। वहीं, कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में 1.07% की मामूली बढ़त के बावजूद, खर्च 10.54% बढ़े, जिससे कंसॉलिडेटेड नेट लॉस ₹963.58 मिलियन तक पहुंच गया, जो पिछले साल ₹813.34 मिलियन था।
🏢 अहम सौदे और रणनीतिक कदम
इस तिमाही में कंपनी ने कुछ खास कदम भी उठाए हैं। Q3 FY26 में, नए लेबर कोड्स (Labour Codes) के कारण अनुमानित वित्तीय असर के लिए ₹13.80 मिलियन (स्टैंडअलोन) और ₹17.19 मिलियन (कंसॉलिडेटेड) का प्रोविजन (provision) किया गया, जिसे एक्सेप्शनल आइटम (exceptional item) माना गया।
रणनीतिक (strategic) तौर पर, S Chand ने दो बड़े फैसले लिए हैं:
- कंपनी की सब्सिडियरी New Saraswati House (India) Private Limited ने SGD 1.50 मिलियन में CPD Singapore Education Services Pte. Limited के 100% इक्विटी शेयर (equity shares) खरीदे। यह डील 29 जनवरी, 2026 तक पूरी हो गई है।
- Vikas Publishing House Private Limited ने अपने प्रिंटिंग डिवीजन (printing division) को अपनी सब्सिडियरी Shri Shyamlal Printing Press Private Limited को ₹530 मिलियन में स्लम्प सेल (slump sale) के जरिए बेच दिया। यह सौदा 1 अक्टूबर, 2025 से प्रभावी है।
🚩 चिंताएं और भविष्य की राह
हालांकि, ऐतिहासिक तौर पर जनवरी-मार्च तिमाही में किताबों की बिक्री बढ़ने से कंपनी को फायदा होता रहा है, लेकिन मौजूदा फाइनेंशियल स्थिति चिंताजनक है। स्टैंडअलोन रेवेन्यू में लगातार गिरावट और दोनों लेवल्स पर बढ़ता घाटा, साथ ही बढ़ते खर्चे, ऑपरेशनल चुनौतियों की ओर इशारा करते हैं। रणनीतिक अधिग्रहण (acquisitions) और रीस्ट्रक्चरिंग (restructuring) से भले ही लंबे समय में फायदा हो, लेकिन अभी ये मौजूदा वित्तीय दबावों को कम नहीं कर पा रहे हैं। निवेशक चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों का इंतजार करेंगे और देखेंगे कि क्या उम्मीद के मुताबिक सीजनल उछाल (seasonal uptick) कंपनी की स्थिति को बेहतर कर पाता है, क्योंकि मैनेजमेंट ने आगे को लेकर कोई खास गाइडेंस (guidance) नहीं दी है।