भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने बेंगलुरु स्थित गेमिंग स्टार्टअप LightFury Games में निवेश किया है। कंपनी का प्रमुख गेम, 'eCricket', सितंबर 2026 में बंद बीटा (Closed Beta) के लिए तैयार है। यह एक प्राइवेट कंपनी है, इसलिए रिटेल निवेशकों के लिए शेयर बाज़ार में निवेश का मौका नहीं है।
रोहित शर्मा अब गेमिंग स्टूडियो में भी?
भारतीय क्रिकेट के 'हिटमैन' रोहित शर्मा अब सिर्फ मैदान पर ही नहीं, बल्कि गेमिंग की दुनिया में भी दस्तक दे रहे हैं। उन्होंने बेंगलुरु की गेमिंग स्टार्टअप LightFury Games में एक निवेशक के तौर पर कदम रखा है। इतना ही नहीं, रोहित शर्मा कंपनी के अपकमिंग वीडियो गेम 'eCricket' में एक लाइसेंस्ड खिलाड़ी के तौर पर भी दिखाई देंगे। गेमिंग स्टूडियो ने यह भी बताया है कि 'eCricket' का बीटा चरण सितंबर 2026 से शुरू होगा। यह कदम दिखाता है कि कैसे हाई-प्रोफाइल एथलीट अब डिजिटल एंटरटेनमेंट स्पेस में अपना पैसा लगा रहे हैं।
LightFury Games का प्लान
साल 2024 में स्थापित LightFury Games का लक्ष्य भारत से AAA-रेटेड गेम्स बनाना है, जिन्हें अक्सर हाई-बजट और क्वालिटी के लिए जाना जाता है। कंपनी ने काफी ध्यान खींचा है, और गेम के अर्ली एक्सेस के लिए 3 लाख से ज़्यादा फैंस रजिस्टर कर चुके हैं। रोहित शर्मा के अलावा, MS Dhoni, Jasprit Bumrah, Hardik Pandya, Shreyas Iyer, Ravindra Jadeja, Tilak Varma और Sai Sudharsan जैसे कई बड़े भारतीय क्रिकेटर भी इस फर्म में पहले ही निवेश कर चुके हैं।
निवेशकों के लिए ज़रूरी जानकारी
गेमिंग इंडस्ट्री के लिए यह खबर भले ही बड़ी हो, लेकिन मार्केट पर नज़र रखने वालों के लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि LightFury Games एक प्राइवेट, वेंचर-कैपिटल से फंडेड स्टार्टअप है। यह किसी भी स्टॉक एक्सचेंज जैसे NSE या BSE पर लिस्टेड नहीं है। इसका मतलब है कि रिटेल निवेशकों के लिए पब्लिक मार्केट में इसके शेयर खरीदने का कोई मौका नहीं है। ऐसी कंपनियों के लिए फंडिंग का ज़रिया आमतौर पर प्राइवेट वेंचर कैपिटल ही होता है, न कि पब्लिक इक्विटी।
गेमिंग सेक्टर में रिस्क और रिवॉर्ड
जो निवेशक गेमिंग सेक्टर पर नज़र रख रहे हैं, उनके लिए LightFury जैसी कंपनियों का बिजनेस मॉडल समझना ज़रूरी है। इन कंपनियों को गेम बनाने में शुरुआत में काफी ज़्यादा पैसा लगाना पड़ता है। गेमिंग एक हाई-रिस्क वाला सेक्टर है, जहाँ सफलता 'हिट' पर निर्भर करती है। हाई-क्वालिटी गेम्स बनाने के लिए टैलेंट, टेक्नोलॉजी और मार्केटिंग में भारी निवेश की ज़रूरत होती है। इस स्पेस के स्टार्टअप्स अक्सर शुरुआती सालों में मुनाफे की जगह प्रोडक्ट और यूजर बेस बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिसके चलते वे वित्तीय नुकसान भी दिखा सकते हैं।
आगे क्या?
ऐसे गेमिंग स्टूडियोज के लिए सबसे बड़ा बिज़नेस रिस्क गेम को सही से बनाना और उसका मार्केट में स्वीकार होना है। कंपनी ने अब तक $19.5 मिलियन से ज़्यादा की फंडिंग जुटाई है। लेकिन, एक पॉपुलर गेम को एक टिकाऊ बिज़नेस में बदलने के लिए लगातार प्लेयर्स को बनाए रखना और कमाई के सही तरीके खोजना ज़रूरी है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी ग्लोबल गेमिंग मार्केट में कैसे मुकाबला करती है, जहाँ उसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय गेमिंग दिग्गजों से टक्कर लेनी है।
कंपनी के लिए अगला बड़ा अपडेट सितंबर 2026 में होने वाले क्लोज्ड बीटा टेस्ट से आने वाली प्रतिक्रिया होगी। यह चरण यह तय करने में अहम होगा कि गेम क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदों पर खरा उतरता है या नहीं, और क्या यह शुरुआती रुचि को लंबे समय तक चलने वाले गेमिंग प्रोडक्ट में बदल सकता है।
