Reliance Group ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में Essel Group के चेयरमैन सुभाष चंद्रा द्वारा लगाए गए मीडिया बायस (Media Bias) के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। यह विवाद सुभाष चंद्रा के पर्सनल इनसॉल्वेंसी मामले और NCLT के हालिया सेटलमेंट के बाद और गहरा गया है।
रिलायंस की आधिकारिक सफाई
Reliance Group ने Bombay Stock Exchange (BSE) और National Stock Exchange (NSE) को दी गई जानकारी में इन आरोपों को आधारहीन करार दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसके मीडिया एसेट्स का संचालन 'इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट' (Independent Media Trust) के तहत होता है, जो पूरी तरह स्वतंत्र हैं और किसी भी व्यक्तिगत हित या एजेंडे से प्रभावित नहीं हैं।
विवाद की जड़: NCLT सेटलमेंट
यह सारा विवाद सुभाष चंद्रा की चल रही पर्सनल इनसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स (Personal Insolvency Proceedings) से जुड़ा है। हाल ही में National Company Law Tribunal (NCLT) ने एक सेटलमेंट प्लान को मंजूरी दी है, जिसके तहत चंद्रा को करीब ₹22,006 करोड़ के दावों को महज ₹6.5 करोड़ के भुगतान के साथ निपटाने की अनुमति दी गई है।
इस पर काफी विवाद छिड़ा हुआ है क्योंकि इसे क्रेडिटर्स के लिए एक बहुत बड़ा 'हेयरकट' (Haircut) माना जा रहा है। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह राशि चंद्रा के पर्सनल लोन की नहीं, बल्कि पर्सनल गारंर के तौर पर की गई देनदारियां हैं। सुभाष चंद्रा का दावा है कि उनके ग्रुप ने कुल ₹45,000 करोड़ कर्ज लिया था, जिसमें से ₹43,000 करोड़ का भुगतान हो चुका है। उन्होंने इस पूरे मामले की इंडिपेंडेंट ऑडिट की मांग भी की है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बाजार के जानकारों के अनुसार, ऐसे हाई-प्रोफाइल मामले कॉर्पोरेट गवर्नेंस और रेप्युटेशनल रिस्क (Reputational Risk) को बढ़ाते हैं। रिलायंस द्वारा रेगुलेटरी फाइलिंग के जरिए सफाई देना यह दर्शाता है कि कंपनी अपने मीडिया बिजनेस को इन कानूनी विवादों से दूर रखना चाहती है। निवेशकों की नजरें अब NCLT की अगली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि क्रेडिटर्स इस सेटलमेंट को चुनौती दे सकते हैं।
