Publicis Sapient की AI क्रांति: मार्केटिंग की स्पीड **50%** बढ़ी, 20 दिन का काम अब सिर्फ 5 दिन में!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Publicis Sapient की AI क्रांति: मार्केटिंग की स्पीड **50%** बढ़ी, 20 दिन का काम अब सिर्फ 5 दिन में!

Publicis Sapient, जो Publicis Groupe की एक इकाई है, ने अपने 'AI-first' मॉडल का इस्तेमाल करके मार्केटिंग कैम्पेन की टाइमलाइन को **20 दिन** से घटाकर सिर्फ **5 दिन** कर दिया है। यह बदलाव AI एजेंट्स और इंसानी विशेषज्ञता के मेल से संभव हुआ है, जो दिखाता है कि कैसे डिजिटल सर्विसेज कंपनियां ऑटोमेशन से अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं।

क्या हुआ?

Publicis Groupe की डिजिटल बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन कंपनी Publicis Sapient ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनी मार्केटिंग प्रक्रियाओं में शामिल करके ऑपरेशनल एफिशिएंसी में ज़बरदस्त सुधार की रिपोर्ट दी है। कंपनी के अनुसार, उनकी 'AI-first' रणनीति ने कैम्पेन पूरा करने के समय को लगभग 20 दिनों से घटाकर 3 से 5 दिनों के बीच ला दिया है। इतना ही नहीं, प्रोसेस फ्लो को भी सुव्यवस्थित किया गया है, जिससे हैंडऑफ की संख्या 50 से घटकर सिर्फ 11 रह गई है। कंपनी का दावा है कि इन बदलावों से टाइम-टू-मार्केट 50% तेज हुआ है और ओवरऑल मार्केटिंग कैपेसिटी में 40% की बढ़ोतरी हुई है।

एफिशिएंसी क्यों ज़रूरी है?

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और मार्केटिंग सर्विसेज सेक्टर की कंपनियों के लिए, ऑपरेशनल एफिशिएंसी मुनाफे का एक अहम जरिया है। दोहराए जाने वाले कामों को ऑटोमेट करके, कंपनियां कम लागत में ज़्यादा काम निपटा सकती हैं। Publicis Sapient ने यह भी बताया कि AI इंटीग्रेशन से लीड कन्वर्जन रेट में 25-35% का सुधार हुआ है, खासकर मार्केटिंग क्वालिफाइड लीड्स (MQL) से सेल्स क्वालिफाइड लीड्स (SQL) में। निवेशकों के लिए, ये आंकड़े दिखाते हैं कि कैसे ऑटोमेशन सीधे तौर पर बॉटम लाइन को प्रभावित कर सकता है, जिससे मार्जिन बेहतर होता है और प्रतिस्पर्धी बाजार में डिलीवरी तेज होती है।

'पीपल-प्लस-प्रोडक्ट' स्ट्रेटेजी

Publicis Sapient अपनी इस अप्रोच को 'people-plus-product' फिलॉसफी बताती है। इसमें कस्टम AI एजेंट्स (जैसे कि उनके इंटरनल प्लेटफॉर्म पर बने) को इंसानी निगरानी के साथ मिलाया जाता है। कंपनी ने 700 से ज़्यादा मार्केटिंग और कम्युनिकेशन टास्क्स का विश्लेषण किया और पाया कि 550 से ज़्यादा AI के नेतृत्व के लिए उपयुक्त हैं। यह स्ट्रेटेजी इस बात पर ज़ोर देती है कि AI मार्केटिंग के कोर रोल (ग्रोथ या कस्टमर रिलेशनशिप) को नहीं बदलता, बल्कि एग्जीक्यूशन मॉडल को बदलता है। कंपनी का कहना है कि इसमें असली वैल्यू मार्केटर्स के 'जर्नी ऑर्केस्ट्रेटर्स' के तौर पर काम करने में है, जो AI आउटपुट का मूल्यांकन और सुधार करते हैं, न कि सिर्फ उन्हें बनाते हैं।

भारत का कनेक्शन

भारत Publicis Sapient के ग्लोबल ऑपरेशंस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। कंपनी दुनिया भर में 20,000 से ज़्यादा लोगों को रोजगार देती है, और भारत इंजीनियरिंग, डिलीवरी और AI इनोवेशन के लिए एक बड़ा हब है। जैसे-जैसे ग्लोबल कंपनियां AI इंटीग्रेशन की ओर बढ़ रही हैं, भारत का सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और डेटा साइंस का टैलेंट पूल इन कंपनियों के लिए इस तरह के प्रोप्राइटरी AI प्लेटफॉर्म बनाने और डिप्लॉय करने में केंद्रीय भूमिका निभाता रहेगा।

आगे क्या देखें?

डिजिटल और आईटी सर्विसेज सेक्टर को ट्रैक करने वाले निवेशकों को प्रतिस्पर्धियों से भी इसी तरह के ऑपरेशनल अपडेट्स की उम्मीद करनी चाहिए। यहां सिर्फ AI को अपनाना ही नहीं, बल्कि ऑपरेटिंग मार्जिन पर इसका वास्तविक प्रभाव और कर्मचारियों की संख्या में समान वृद्धि के बिना रेवेन्यू बढ़ाने की कंपनियों की क्षमता पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा। इस 'AI-first' अप्रोच की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां अपने कर्मचारियों को AI सिस्टम मैनेज करने के लिए कितनी प्रभावी ढंग से री-ट्रेन कर पाती हैं और ये एफिशिएंसी गेन कितनी जल्दी स्थायी क्लाइंट डिमांड और कॉन्ट्रैक्ट जीत में तब्दील होते हैं।

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