फिल्म प्रोड्यूसर्स ने PVR Inox के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिसमें 'वर्चुअल प्रिंट फीस' (VPF) को बदलकर नए शुल्क लगाने की बात कही गई थी। प्रोड्यूसर्स का कहना है कि यह कोई राहत नहीं, बल्कि पुराने खर्चों को नया रूप देने की कोशिश है।
विवाद की जड़ क्या है?
साल 2007 में जब सिनेमाघरों को पारंपरिक रील से डिजिटल प्रोजेक्टर्स पर शिफ्ट किया जा रहा था, तब 'वर्चुअल प्रिंट फीस' (VPF) लागू की गई थी। उस वक्त प्रोड्यूसर्स ने इसे सपोर्ट किया था, लेकिन दो दशक बाद जब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री का स्टैंडर्ड बन चुका है, तब प्रोड्यूसर्स इसे हटाना चाहते हैं। उनका तर्क है कि यह फीस अब पुरानी और अनावश्यक हो चुकी है।
क्या था प्रस्ताव?
PVR Inox ने VPF की जगह 'एग्जीबिशन सर्विस चार्ज' या 'रिविज्ड रेवेन्यू शेयर' मॉडल अपनाने का सुझाव दिया था। प्रोड्यूसर्स का दावा है कि ये विकल्प केवल लागत का ढांचा बदल रहे हैं और इससे उन्हें कोई वास्तविक वित्तीय राहत नहीं मिल रही। आलोचकों का मानना है कि ये फीस उन डिजिटल खर्चों की भरपाई जबरन वसूलने जैसा है, जिनका भुगतान पहले ही किया जा चुका है।
रेगुलेटरी और फाइनेंशियल दबाव
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) फिलहाल इस मामले की जांच कर रहा है। निवेशकों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि VPF मल्टीप्लेक्स ऑपरेटरों के लिए रेवेन्यू का एक स्थिर जरिया रहा है।
फाइनेंशियल मोर्चे पर, PVR Inox ने सितंबर 2026 में ₹300 करोड़ का शेयर बायबैक पूरा किया था, जिसमें 20 लाख से ज्यादा शेयर कैंसिल किए गए। कंपनी हाल ही में प्रॉपर्टी डेवलपर्स से कथित किकबैक की खबरों को लेकर भी चर्चा में रही थी, हालांकि प्रबंधन ने इन आरोपों को निराधार बताया है।
निवेशकों के लिए संकेत
अब सबकी नजर CCI के अंतिम फैसले पर है। जब तक यह विवाद हल नहीं होता, कंपनी के रेवेन्यू स्ट्रक्चर को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी भविष्य में फिल्म निर्माताओं के साथ अपने संबंधों और मार्जिन को कैसे संतुलित करती है।
