Pro Kabaddi League (PKL) के अगले मीडिया राइट्स को लेकर घमासान मचा है। ब्रॉडकास्टर JioStar पिछले **₹905 करोड़** के बेंचमार्क में **50%** तक की भारी कटौती चाहता है, जिससे फ्रेंचाइजी मालिकों की चिंता बढ़ गई है।
वैल्यूएशन पर तकरार
Pro Kabaddi League का अगला मीडिया राइट्स साइकिल एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। जहां एक तरफ फ्रेंचाइजी टीमें पिछले ₹905 करोड़ के बेंचमार्क को बरकरार रखने की कोशिश कर रही हैं, वहीं ब्रॉडकास्टर JioStar इस फीस में 50% तक की कटौती की मांग कर रहा है। यह विवाद खेल जगत में बढ़ती उस चुनौती को दर्शाता है जहां बढ़ती कॉस्ट को जस्टिफाई करना मुश्किल होता जा रहा है।
फाइनेंशियल हेल्थ और चुनौतियां
लीग की ऑपरेटर कंपनी, Mashal Sports ने FY26 में ₹310 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹42 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹34 करोड़ के मुकाबले बेहतर है। इसके बावजूद, ब्रॉडकास्टर को इस लीग से सालाना ₹50 करोड़ से ₹100 करोड़ तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
इस लीग की कुल व्यूअरशिप 23 करोड़ (डिजिटल और टीवी मिलाकर) पर अटकी हुई है, जिसमें टीवी का योगदान 19 करोड़ है। व्यूअरशिप में बढ़ोतरी न होना ब्रॉडकास्टर्स के लिए बड़ी बाधा बना हुआ है।
रिस्क फैक्टर और मॉडल में बदलाव
मौजूदा स्थिति इसलिए भी जटिल है क्योंकि JioStar के पास Mashal Sports में 74% की हिस्सेदारी है। इसके अलावा, Star India और Viacom18 का विलय, टीवी दर्शकों की घटती संख्या और विज्ञापन नियमों में सख्ती ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।
फ्रेंचाइजी टीमें Indian Super League का उदाहरण देखकर डरी हुई हैं, जहाँ ब्रॉडकास्टर के हटने के बाद वैल्यूएशन ₹275 करोड़ से गिरकर ₹8.62 करोड़ रह गया था। अब चर्चा इस बात पर हो रही है कि रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल में बदलाव किया जाए। फिलहाल Mashal Sports मीडिया राइट्स की 80% इनकम अपने पास रखती है, जबकि 12 फ्रेंचाइजी के बीच केवल 20% हिस्सा बंटता है। क्या ओपन बिडिंग इस खेल को बचा पाएगी? यह देखना दिलचस्प होगा।
