Prasar Bharati अब टेलीविजन रेटिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव लाने की योजना बना रही है। सरकार एक ऐसी नई मल्टी-एजेंसी व्यवस्था पर विचार कर रही है, जो लंबे समय से चले आ रहे Broadcast Audience Research Council (BARC) के एकाधिकार को खत्म कर सकती है और भारत के मीडिया सेक्टर के विज्ञापन रेवेन्यू मॉडल को पूरी तरह बदल सकती है।
रेटिंग सिस्टम में बड़े बदलाव की आहट
प्रसार भारती के CEO गौरव द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि सरकार अब सिंगल-एजेंसी के वर्चस्व को खत्म करने के लिए नए प्रस्तावों पर काम कर रही है। इस नई पहल का मकसद भारत में दर्शकों की संख्या मापने के लिए एक कॉम्पिटिटिव और मल्टी-करेंसी सिस्टम तैयार करना है।
मीडिया सेक्टर के लिए क्या हैं मायने?
भारतीय टेलीविजन विज्ञापन इंडस्ट्री का आकार अरबों रुपयों में है, जो अभी पूरी तरह से केवल एक डेटा प्रोवाइडर पर निर्भर है। यदि रेटिंग के लिए एक से अधिक एजेंसियां बाजार में आती हैं, तो इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे मीडिया हाउस अपने विज्ञापन दरों (Ad Rates) को अधिक सटीक तरीके से नेगोशिएट कर पाएंगे, जिसका सीधा असर मीडिया कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।
भरोसे की जंग और AI का दखल
प्रसार भारती केवल डेटा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपनी कंटेंट स्ट्रैटेजी को भी बदल रही है। कंपनी 'ट्रस्ट डेफिसिट' को दूर करने के लिए एल्गोरिदम आधारित कंटेंट के बजाय ग्राउंड रिपोर्टिंग पर जोर दे रही है। साथ ही, प्रसार भारती ने न्यूज रूम में AI के इस्तेमाल को लेकर भी चेतावनी दी है और डीपफेक व भ्रामक खबरों को रोकने के लिए कंटेंट की सख्त लेबलिंग की वकालत की है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
अब सबकी नजरें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) की आगामी नीतियों पर टिकी हैं। रेटिंग सिस्टम को लागू करने का समय, नई एजेंसियों के लिए तकनीकी मानक और इंडस्ट्री की इस बदलाव को अपनाने की इच्छाशक्ति ही तय करेगी कि मीडिया कंपनियों की फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर इसका कितना और कब तक असर दिखेगा।
