भारतीय मीडिया सेक्टर में दो तरफा तस्वीर दिख रही है। एक तरफ मल्टीप्लेक्स ऑपरेटर्स बॉक्स ऑफिस की कमाई से मालामाल हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ टीवी ब्रॉडकास्टर्स विज्ञापन की सुस्ती और ऊंचे खर्चों से जूझ रहे हैं।
भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में इस वक्त सिनेमाघरों और पारंपरिक टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स के बीच प्रदर्शन का बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
मल्टीप्लेक्स की चांदी
सिनेमाघरों के लिए दौर शानदार है और PVR Inox इसका सबसे बड़ा फायदा उठा रही है। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में हिंदी फिल्मों का नेट कलेक्शन ₹1,290 करोड़ रहने का अनुमान है, जो साल-दर-साल 30% की बढ़ोतरी है। अच्छी बात यह है कि औसत टिकट की कीमतों में 12% और प्रति व्यक्ति खर्च में 13% का उछाल आया है, जो बताता है कि ओटीटी के दौर में भी बड़े पर्दे का क्रेज बरकरार है। कंपनी ने हाल ही में ₹300 करोड़ का शेयर बायबैक भी पूरा किया है, जिसमें 20 लाख से ज्यादा शेयरों को खत्म किया गया है।
ब्रॉडकास्टर्स पर दबाव
इसके उलट Zee Entertainment और Sun TV जैसे ब्रॉडकास्टर्स के लिए हालात मुश्किल बने हुए हैं। Zee का मार्केटिंग खर्च उनकी कुल बिक्री के 24% से अधिक हो चुका है, जिससे मुनाफे पर बुरा असर पड़ा है। यही कारण है कि पिछले एक साल में कंपनी के शेयरों में करीब 36% की गिरावट आई है।
Sun TV के लिए चुनौतियां और बड़ी हैं, जहां रेवेन्यू में 30% और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 40% तक की भारी गिरावट का अनुमान है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से मिल रही कड़ी टक्कर और विज्ञापन बाजार की सुस्ती इनके पुराने बिजनेस मॉडल को कमजोर कर रही है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
