साउथ इंडियन फिल्मों के बढ़ते जलवे के बीच PVR INOX अब IMAX और 4DX जैसे प्रीमियम फॉर्मेट्स पर दांव लगा रहा है। हालांकि, सरकारी टिकट प्राइस कैप और बढ़ती लागत कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन के लिए एक बड़ी परीक्षा बनी हुई है।
भारतीय सिनेमा का मिजाज बदल रहा है। अब 'Jailer 2' और 'Toxic' जैसी बड़ी साउथ इंडियन फिल्में सीधे IMAX और 4DX जैसे बड़े फॉर्मेट्स में रिलीज हो रही हैं। PVR INOX के लिए यह मौका भी है और चुनौती भी। फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही तक कंपनी के पास 113 शहरों में कुल 1,782 स्क्रीन्स हैं।
फाइनेंशियल हेल्थ और विस्तार
कंपनी ने शानदार वापसी करते हुए फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ₹71 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है। कंपनी अब नेट कैश-पॉजिटिव है और हाल ही में ₹300 करोड़ का शेयर बायबैक (₹1,450 प्रति शेयर के भाव पर) पूरा किया है। मेट्रो शहरों के बाद, कंपनी अपने 'Smart Cinema' मॉडल के जरिए छोटे शहरों में तेजी से पैर पसार रही है। इस मॉडल का खर्च मात्र ₹1.9 करोड़ प्रति स्क्रीन आता है, जो पारंपरिक लग्जरी मल्टीप्लेक्स के मुकाबले काफी कम है।
मुनाफे के रास्ते में क्या हैं रोड़े?
सबसे बड़ी समस्या सरकारी नियम हैं। कर्नाटक जैसे राज्यों में टिकट की कीमतों पर ₹200 तक की सीलिंग लगाई गई है। IMAX या 4DX जैसे महंगे फॉर्मेट्स का खर्च निकालना तब मुश्किल हो जाता है जब टिकट के दाम पर कैप हो। हाई फिक्स्ड ऑपरेटिंग कॉस्ट के कारण अगर ऑक्युपेंसी में जरा भी कमी आती है, तो प्रॉफिट मार्जिन सीधे दबाव में आ जाता है।
निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या PVR INOX छोटे शहरों में इन महंगे फॉर्मेट्स के साथ सही ऑक्युपेंसी रेट हासिल कर पाएगी या नहीं, खासकर तब जब शो-टाइम के लिए हॉलीवुड फिल्मों से भी कड़ी टक्कर मिल रही है।
