कंपनी का स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 175.4% बढ़कर ₹950 मिलियन हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹345 मिलियन था। कंसोलिडेटेड PAT में भी 166.6% की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹957 मिलियन रहा, जबकि पिछले साल यह ₹359 मिलियन था। कंपनी के राजस्व (Revenue) में भी अच्छी वृद्धि हुई है; स्टैंडअलोन रेवेन्यू 11.1% बढ़कर ₹17,736 मिलियन और कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 9.5% बढ़कर ₹18,798 मिलियन पर पहुंच गया।
हालांकि, तिमाही दर तिमाही (QoQ) आधार पर देखें तो प्रॉफिट में कुछ नरमी आई है। स्टैंडअलोन PAT पिछले क्वार्टर के ₹1,039 मिलियन से 8.6% घटकर ₹950 मिलियन पर आ गया। इसी तरह, कंसोलिडेटेड PAT में भी 9.5% की गिरावट आई, जो ₹1,057 मिलियन से ₹957 मिलियन रहा। इस तिमाही गिरावट की मुख्य वजह नए Labour Codes को लागू करने पर आए ₹423 मिलियन (स्टैंडअलोन) और ₹446 मिलियन (कंसोलिडेटेड) के एक्स्ट्रा खर्चे हैं। कंपनी अभी इन नियमों पर और स्पष्टीकरण का इंतजार कर रही है।
कंपनी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए अपनी सब्सिडियरी Zea Maize Private Limited में अपनी 93.27% हिस्सेदारी ₹2,268 मिलियन में बेच दी है। इस बिक्री से कंपनी की लिक्विडिटी (liquidity) और मजबूत होने की उम्मीद है। कंपनी की वित्तीय सेहत भी काफी मजबूत दिख रही है, जिसका अंदाजा 0.15 के बेहद कम Debt-to-Equity ratio से लगाया जा सकता है।
आने वाले समय के लिए, निवेशकों को कुछ बातों पर गौर करना होगा। मैनेजमेंट ने भविष्य के लिए कोई खास गाइडेंस (guidance) जारी नहीं किया है, जिससे आगे की ग्रोथ का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है। साथ ही, रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद प्रॉफिट में आई यह QoQ गिरावट और लेबर कोड से जुड़े अनिश्चित खर्चे कंपनी के लिए थोड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं।
