PVR INOX एक बड़ी आंतरिक जांच (Internal Probe) के घेरे में है। कंपनी के पूर्व ग्रोथ एग्जीक्यूटिव प्रमोद अरोड़ा पर ₹200 करोड़ के डेवलपर किकबैक लेने का आरोप लगा है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
गवर्नेंस पर उठे सवाल
कंपनी के पूर्व CEO (ग्रोथ एंड इन्वेस्टमेंट) प्रमोद अरोड़ा के इस्तीफे के बाद मामला गरमा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सिनेमा प्रॉपर्टी निर्माण से जुड़े डील्स में ₹200 करोड़ तक की धांधली का आरोप है। साल 2023 में PVR और INOX के मर्जर के बाद, को-प्रमोटर्स अजय और संजीव बिजली के सामने यह सबसे बड़ी गवर्नेंस चुनौती है। बोर्ड अब इंटरनल कंट्रोल्स को सख्त कर रहा है ताकि रेगुलेटरी संस्थाओं की किसी भी कार्रवाई से बचा जा सके।
फाइनेंशियल सेहत और बिजनेस मॉडल
विवादों के बीच कंपनी ने हालिया नतीजों में रिकवरी दिखाई है। चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में PVR INOX ने ₹56.5 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। कंपनी ने 30 जून 2026 तक ₹80.7 करोड़ की नेट कैश पॉजिटिव स्थिति भी हासिल की है। कंपनी अब अपने बिजनेस मॉडल को 100% FOCO (Franchise-Owned, Company-Operated) मॉडल में बदल रही है, ताकि नए प्रोजेक्ट्स पर भारी-भरकम पूंजी खर्च कम किया जा सके।
बायबैक और निवेशकों का नज़रिया
कंपनी ने ₹300 करोड़ का शेयर बायबैक प्रोग्राम लॉन्च किया है, जिसके लिए ₹1,450 प्रति शेयर की कीमत तय की गई थी (रिकॉर्ड डेट 4 सितंबर 2026)। हालांकि मैनेजमेंट का मानना है कि कंपनी का कैश फ्लो मजबूत है, लेकिन मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह जांच कंपनी के कानूनी खर्चों में बढ़ोतरी करेगी या फिर कोई बड़ा ढांचागत रिस्क सामने आएगा। भविष्य में निवेशकों के लिए कंपनी का मुनाफा बरकरार रखना और बिना किसी और गवर्नेंस विवाद के एक्सपेंशन करना सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
