Ministry of Information and Broadcasting ने सभी प्राइवेट टीवी चैनल्स के लिए सख्त गाइडलाइन्स जारी की हैं। अब न्यूज़ चैनल्स को 'Cable TV Act' के तहत प्रोग्राम कोड का पालन करना अनिवार्य होगा, जिसमें भड़काऊ डिबेट्स और AI के गलत इस्तेमाल पर लगाम कसने के निर्देश दिए गए हैं।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने देश के सभी प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनल्स के लिए एक सख्त एडवाइजरी जारी की है। यह फैसला एक इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी द्वारा कंटेंट ट्रेंड्स की समीक्षा के बाद लिया गया है, जिसमें कई चैनल्स को नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया गया था। मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग में फैक्चुअल एक्यूरेसी सुनिश्चित करना और भड़काऊ भाषा पर रोक लगाना है।
AI और टेक्नोलॉजी पर नई गाइडलाइन्स
सरकार ने अब न्यूज़ रूम्स में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर स्पष्ट रुख अपनाया है। चैनल्स को हिदायत दी गई है कि 'Generative AI' का उपयोग केवल सहायता के लिए किया जाना चाहिए। AI से बनी किसी भी खबर की प्रमाणिकता (Authenticity) की जिम्मेदारी पूरी तरह से चैनल की होगी। इसका मतलब है कि मीडिया कंपनियों को अब अपने फैक्ट-चेकिंग सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाना होगा, जिससे ऑपरेशनल खर्चों में बढ़त हो सकती है।
लाइव डिबेट्स और सुरक्षा प्रोटोकॉल
लाइव डिबेट्स के दौरान पैनलिस्ट्स का चयन और भी सावधानी से करना होगा ताकि सांप्रदायिक या भड़काऊ चर्चा से बचा जा सके। मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि विवादित स्थिति पैदा होने पर चैनल्स 'फीड डिले' या 'म्यूट' जैसे टेक्निकल हस्तक्षेप का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, एंटी-टेरर ऑपरेशंस की लाइव कवरेज पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा; चैनल्स को केवल आधिकारिक सुरक्षा ब्रीफिंग पर ही निर्भर रहना होगा।
निवेशकों के लिए जोखिम (Market Impact)
लिस्टेड मीडिया कंपनियों के शेयरधारकों के लिए यह एक सतर्क रहने वाला समय है। रेगुलेटरी स्क्रूटनी बढ़ने से कंपनियों के कंप्लायंस और एडिटोरियल वेरिफिकेशन की लागत बढ़ सकती है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सीमाओं को दिखाने के लिए केवल 'Survey of India' के प्रमाणित मैप्स का ही उपयोग किया जाए। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनियां अपनी व्यूअरशिप बरकरार रखते हुए इन नियमों को कैसे लागू करती हैं और क्या इसका असर आने वाली तिमाही के नतीजों (Quarterly Results) पर पड़ता है।
