Media Sector Update: विज्ञापन बजट के लिए क्रिकेट और रियलिटी शो बने सहारा, टीवी रेटिंग्स के संकट से बाजार में हलचल

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AuthorNeha Patil|Published at:
Media Sector Update: विज्ञापन बजट के लिए क्रिकेट और रियलिटी शो बने सहारा, टीवी रेटिंग्स के संकट से बाजार में हलचल

भारत में टीवी रेटिंग्स डेटा के निलंबन के चलते विज्ञापनदाता अब सुरक्षित दांव के रूप में क्रिकेट और बड़े रियलिटी शोज़ पर फोकस कर रहे हैं। 2026 में अब तक टीवी विज्ञापन वॉल्यूम में **7%** की गिरावट आई है, जिससे मीडिया कंपनियों के लिए त्योहारों का सीजन काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

टीवी रेटिंग्स का डेटा न होने से मीडिया प्लानिंग का पूरा ढांचा हिल गया है। एडवर्टाइजर्स ने छोटे और प्रायोगिक शोज़ से पैसा निकालकर सीधे 'सेफ बेट्स' यानी बड़े क्रिकेट इवेंट्स और बिग बॉस या कौन बनेगा करोड़पति जैसे शो पर दांव लगाना शुरू कर दिया है।

विज्ञापन रणनीति में बदलाव

रेटिंग डेटा के अभाव में अब ब्रांड वैल्यू ही विज्ञापन की कीमत तय कर रही है। जिन ब्रॉडकास्टर्स के पास वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड जैसी टीमों के खिलाफ लाइव स्पोर्ट्स के राइट्स हैं, वे अपनी विज्ञापन दरें (Ad Rates) बनाए रखने में सफल रहे हैं। वहीं, सामान्य मनोरंजन चैनलों के लिए स्थिति थोड़ी कठिन है। साल 2026 के जनवरी से जुलाई के बीच टीवी विज्ञापन वॉल्यूम में 7% की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ब्रॉडकास्टर्स अब इन्वेंट्री को बंडल (Bundle) करने पर मजबूर हैं।

त्योहारों का सीजन और चुनौतियां

फेस्टिव सीजन मीडिया कंपनियों की सालाना कमाई के लिए बेहद जरूरी है। अनुमान है कि इस साल फेस्टिव एडवरटाइजिंग खर्च ₹62,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। निवेशक अब कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों में यह देख रहे हैं कि क्या वे इस खर्चे का बड़ा हिस्सा अपने नाम कर पा रही हैं या नहीं।

इसके अलावा, एडवर्टाइजर्स अब केवल टीवी पर निर्भर न रहकर डिजिटल इंटीग्रेशन की तरफ बढ़ रहे हैं। जो कंपनियां डिजिटल और टीवी दोनों प्लेटफार्मों पर मजबूत पकड़ रखती हैं, वे इस अनिश्चितता के दौर में कम जोखिम का सामना कर रही हैं। भविष्य में टीवी रेटिंग्स पॉलिसी 2026 का समाधान ही इस सेक्टर की तस्वीर साफ करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.