भारत का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इंडस्ट्री अब एक-एक फिल्म प्रोजेक्ट पर दांव लगाने के बजाय 'इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी' (IP) बनाने पर फोकस कर रही है, जिसके तहत फाइनेंशियल ईयर 2027 तक **₹59,000 करोड़** के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में अब पूंजी लगाने और कंटेंट को परखने का तरीका पूरी तरह बदल रहा है। अब तक इंडस्ट्री एक प्रोजेक्ट-दर-प्रोजेक्ट मॉडल पर चलती थी, जहां सफलता केवल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर निर्भर थी। लेकिन अब रिस्क कम करने के लिए प्रोडक्शन हाउसेस लंबी अवधि की संपत्ति यानी 'इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी' (IP) बनाने पर जोर दे रहे हैं।\n\n### निवेश का नया लक्ष्य: ₹59,000 करोड़\nइंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि 'स्क्रीन इकोनॉमी' में फाइनेंशियल ईयर 2027 तक कुल ₹59,000 करोड़ का निवेश हो सकता है। यह पैसा अब ऐसी फ्रैंचाइजी बनाने में लगाया जा रहा है, जो थिएट्रिकल रिलीज के साथ-साथ स्ट्रीमिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी लंबे समय तक कमाई कर सके। यह मॉडल पारंपरिक 'हिट-या-फ्लॉप' रिस्क से कहीं ज्यादा स्टेबल है।\n\n### कंटेंट और कॉम्पिटिशन में बदलाव\nमौजूदा समय में रीजनल कंटेंट का दबदबा बढ़ गया है और यह कुल फीचर-फिल्म प्रोडक्शन का 65% से ज्यादा हिस्सा कवर कर रहा है। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स अब सिर्फ डिस्ट्रीब्यूटर नहीं रहे, बल्कि खुद कंटेंट बना रहे हैं, जिससे थिएटर और डिजिटल का अंतर धुंधला हो गया है।\n\n### लागत में कटौती और परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव्स\nग्लोबल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने अब अपना खर्च कम करना शुरू कर दिया है, जिसके चलते फिल्मों की एक्विजिशन कॉस्ट में 35% तक की गिरावट आई है। प्रोडक्शन हाउसेस ने भी टैलेंट को भारी-भरकम एडवांस फीस देने के बजाय 'परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव्स' का रास्ता अपनाया है, ताकि प्रोजेक्ट की सफलता के साथ ही कमाई जुड़ी रहे।\n\nनिवेशकों के लिए अब यह देखना अहम है कि कौन से प्रोडक्शन हाउसेस सिर्फ मूवी स्लेट पर नहीं, बल्कि अपनी IP पोर्टफोलियो की वैल्यू बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं। लॉन्ग टर्म में वही कंपनियां टिकेंगी जो कंटेंट का इकोसिस्टम बनाकर मार्जिन मेंटेन कर सकेंगी।
