Media Giants: रीजनल और इंटरैक्टिव कंटेंट पर बड़ा दांव, बदल रही है मीडिया दिग्गजों की रणनीति

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Media Giants: रीजनल और इंटरैक्टिव कंटेंट पर बड़ा दांव, बदल रही है मीडिया दिग्गजों की रणनीति

भारत की प्रमुख मीडिया कंपनियां अब रीजनल भाषाओं और इंटरैक्टिव नॉन-फिक्शन शो पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। दर्शक जुड़ाव बढ़ाने के लिए यह एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है, लेकिन इसके साथ ही बढ़ती प्रोडक्शन लागत का दबाव भी कंपनियों के लिए चुनौती बना हुआ है।

कंटेंट की बदलती दुनिया

मीडिया जगत के बदलते मिजाज को देखते हुए कंपनियां अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही हैं। हाल ही में हुए FICCI FRAMES 2026 इवेंट में दिग्गज अधिकारियों ने साफ कर दिया कि अब सारा जोर रीजनल कंटेंट और इंटरैक्टिव शो पर होगा। इसका मकसद ओटीटी (OTT) और टीवी के बीच बंट चुके दर्शकों को फिर से वापस लाना है।

क्यों है यह जरूरी?

JioStar के एंटरटेनमेंट सीईओ Kevin Vaz का मानना है कि अब दर्शक सिर्फ कंटेंट देखना नहीं चाहते, बल्कि उसमें शामिल होना चाहते हैं। रियलिटी शो और वोटिंग जैसे इंटरैक्टिव फॉर्मेट्स से दर्शक शो का हिस्सा बन जाते हैं, जिससे 'स्टिकिनेस' बढ़ती है और विज्ञापनदाताओं के लिए भी यह एक बेहतर प्लेटफॉर्म साबित होता है।

रीजनल कंटेंट पर फोकस

Zee Entertainment के सीईओ Punit Goenka ने बताया कि रीजनल प्रोग्रामिंग अब कोई साइड प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि बिजनेस का मुख्य हिस्सा बन चुकी है। Amazon Prime Video का डेटा भी यही कहता है कि अब बड़ी संख्या में सब्सक्राइबर एक साथ 4 से ज्यादा भाषाओं में कंटेंट देख रहे हैं।

क्या है निवेश का जोखिम?

Sony Pictures Networks India के एमडी Gaurav Banerjee के अनुसार, डिजिटल-फर्स्ट और शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट पर पकड़ बनाने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। हालांकि यह ग्रोथ के लिए जरूरी है, लेकिन निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां बढ़ती प्रोडक्शन लागत और रेवेन्यू के बीच तालमेल कैसे बिठाती हैं। आने वाली तिमाहियों में यह तय करेगा कि मीडिया कंपनियों के मार्जिन पर इसका कितना असर पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.