महाराष्ट्र सरकार अब Gen-Z दर्शकों को ध्यान में रखकर मॉडर्न, टेक-ंनोलोजी पर आधारित मराठी फिल्मों में निवेश करने पर विचार कर रही है। इस पहल का मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बेहतर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को शामिल कर क्षेत्रीय सिनेमा की व्यावसायिक पहुंच को बढ़ाना है।
Gen-Z को टारगेट करने की तैयारी
महाराष्ट्र सरकार ने अब नई पीढ़ी यानी Gen-Z दर्शकों को लुभाने के लिए खास तैयारी की है। राज्य सरकार ऐसी मॉडर्न, टेक-ंनोलोजी पर आधारित मराठी फिल्मों में निवेश करने की योजना बना रही है, जो खासकर युवाओं को पसंद आएं। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने बताया है कि सरकार एक ऐसी रूपरेखा तैयार कर रही है जिससे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाली फिल्मों को सपोर्ट मिल सके, साथ ही मराठी भाषा और संस्कृति का मूल स्वरूप भी बना रहे।
क्षेत्रीय सिनेमा को मिलेगी नई उड़ान
इस पहल का मुख्य उद्देश्य मराठी फिल्म इंडस्ट्री की व्यावसायिक क्षमता को बढ़ाना है। मंत्री शेलार ने कहा कि मराठी सिनेमा में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन अक्सर फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूशन, स्क्रीन की उपलब्धता और युवा दर्शकों तक पहुंचने में दिक्कतें आती हैं। आज की युवा पीढ़ी स्मार्टफोन और OTT प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा समय बिताती है, इसलिए सरकार इस कमी को दूर करने के लिए एक ऐसा मॉडल बनाने की कोशिश कर रही है जिसमें प्रोडक्शन के स्टैंडर्ड्स हाई हों और दर्शकों तक पहुंचने के तरीके भी असरदार हों।
फिल्म सिटी का होगा कायापलट
इस विजन का एक अहम हिस्सा फिल्म सिटी का आधुनिकीकरण है। फिल्म सिटी की मैनेजिंग डायरेक्टर, स्वाति महासे पाटील ने प्रस्ताव दिए हैं कि फिल्म सिटी को सिर्फ शूटिंग लोकेशन से बदलकर इंडस्ट्री के लिए एक पूरा इकोसिस्टम बनाया जाए। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना, टेक्निकल स्किल्स को बढ़ाना और बिजनेस प्रोसेसेज को सुव्यवस्थित करना शामिल है, ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हाई-एंड विजुअल इफेक्ट्स जैसी मॉडर्न तकनीकों की मांगों को पूरा किया जा सके।
सरकारी पहलों पर इंडस्ट्री की नजर
महाराष्ट्र के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर के लिए यह एक बड़ा कदम है, जो बदलते मीडिया परिदृश्य को दर्शाता है। सरकार AI और मॉडर्न प्रोडक्शन तकनीकों को बढ़ावा देकर ऐसी कंटेंट तैयार करना चाहती है जो आजकल के कॉम्पिटिटिव मार्केट में अपनी जगह बना सके। हालांकि, इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि ऐसी सरकारी पहलों की सफलता उसके एग्जीक्यूशन पर निर्भर करती है। मॉडर्न टेक्नोलॉजी और सांस्कृतिक बारीकियों के बीच संतुलन बनाना, और एक सेल्फ-सस्टेनिंग कमर्शियल मॉडल तैयार करना बड़ी चुनौतियां होंगी।
आगे चलकर, यह देखना होगा कि सरकार डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को कैसे सपोर्ट करती है और क्या इससे फिल्म प्रोडक्शन और मार्केटिंग के लिए नए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल सामने आते हैं।
