JioStar के वाइस-चेयरमैन Uday Shankar ने भारतीय स्पोर्ट्स मीडिया सेक्टर को लेकर निवेशकों को आगाह किया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस सेक्टर में 5 साल के अंदर प्रॉफिट का लक्ष्य रखना हकीकत से दूर है, क्योंकि मीडिया राइट्स की बढ़ती लागत और सीमित कमाई के चलते यहां चुनौतियां ज्यादा हैं।
मुनाफे की राह में क्या हैं रोड़े?
APOS Sports Edge 2026 इवेंट के दौरान, Uday Shankar ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग के मौजूदा मॉडल पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मीडिया राइट्स खरीदने की होड़ और उससे होने वाली कमाई (ARPU) के बीच भारी अंतर है। भले ही व्यूअरशिप के आंकड़े कितने भी बड़े क्यों न हों, लेकिन यह बिजनेस अभी भी एक बड़े स्ट्रक्चरल इम्बैलेंस (Structural Imbalance) से जूझ रहा है।
JioStar की नई रणनीति
JioStar खुद इस चुनौती को करीब से देख रही है। कंपनी का इशारा साफ है कि अब वे महंगे स्पोर्ट्स राइट्स कॉन्ट्रैक्ट्स को रीनेगोशिएट करने या उन पर दोबारा विचार करने की ओर कदम उठा सकते हैं। ध्यान अब 'आक्रामक विस्तार' से हटकर 'ऑपरेशनल डिसिप्लिन' (Operational Discipline) पर शिफ्ट हो रहा है ताकि लंबे समय के लिए वैल्यू क्रिएट की जा सके।
डिजिटल की ओर झुकाव और खेलों में विविधता
इस सेक्टर में टिके रहने के लिए अब कंपनियों को पारंपरिक टीवी से हटकर कनेक्टेड टीवी (Connected TV) पर ध्यान देना होगा। साथ ही, क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों का भी भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, कबड्डी जैसे स्पोर्ट्स के 45 करोड़ से ज्यादा प्रशंसक हैं। अब मीडिया हाउसेस का लक्ष्य सिर्फ टूर्नामेंट्स की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि बेहतर 'व्यूअर एक्सपीरियंस' के जरिए एक मजबूत बिजनेस मॉडल तैयार करना है।
