Jailer 2 के मेकर्स ने PVR Inox और Cinepolis जैसे बड़े मल्टीप्लेक्स चेन्स में फिल्म रिलीज नहीं करने का फैसला लिया है। 'थियेट्रिकल विंडो' को लेकर हुए विवाद के चलते फिल्म निर्माता अब बॉक्स ऑफिस के बजाय डिजिटल स्ट्रीमिंग रेवेन्यू को प्राथमिकता दे रहे हैं।
विवाद की मुख्य वजह क्या है?
Jailer 2 के प्रोड्यूसर्स और देश के दिग्गज मल्टीप्लेक्स ऑपरेटर्स, जैसे PVR Inox और Cinepolis, के बीच 'थियेट्रिकल विंडो' को लेकर असहमति बनी है। थियेट्रिकल विंडो वह तय समय होता है जब तक फिल्म केवल सिनेमाघरों में ही दिखाई जाती है।
आमतौर पर मल्टीप्लेक्स ऑपरेटर्स 8 हफ्ते की एक्सक्लूसिविटी की मांग करते हैं ताकि टिकट और फूड-एंड-बेवरेज की बिक्री से मुनाफा कमाया जा सके। लेकिन, इस फिल्म के मेकर्स इस विंडो को घटाकर सिर्फ 4 हफ्ते करना चाहते थे ताकि इसे जल्द डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाया जा सके। बात नहीं बनने पर मेकर्स ने फिल्म को केवल स्वतंत्र और छोटी रीजनल चेन्स में रिलीज करने का कदम उठाया।
मीडिया सेक्टर के लिए नया ट्रेंड
यह घटना भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में आ रहे बड़े बदलाव का संकेत है। अब प्रोडक्शन हाउस बॉक्स ऑफिस की अनिश्चितता के बजाय स्ट्रीमिंग डील से मिलने वाले फिक्स्ड रेवेन्यू को तरजीह दे रहे हैं। मल्टीप्लेक्स इन्वेस्टर्स के लिए यह एक बड़ा रिस्क है, क्योंकि अगर बड़ी फिल्में डिजिटल-फर्स्ट रणनीति अपनाती हैं, तो सिनेमाघरों में कंटेंट की कमी हो सकती है, जिससे फुटफॉल और ऑक्यूपेंसी प्रभावित होती है।
बॉक्स ऑफिस पर क्या दिखा असर?
बड़े नेशनल चेन्स, जो हिंदी बॉक्स ऑफिस का लगभग 70% हिस्सा नियंत्रित करते हैं, वहां फिल्म रिलीज न होने के बावजूद इसे छोटे थियेटर्स में अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। फिल्म ने अब तक कुल ₹10.9 करोड़ की कमाई की है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, दूसरे दिन ₹2.9 करोड़ के मुकाबले तीसरे दिन कमाई बढ़कर ₹4.5 करोड़ रही। इससे साफ है कि फिल्म की डिमांड तो है, लेकिन बड़े मल्टीप्लेक्स में न होने के कारण इसकी कमाई की क्षमता सीमित रही।
