इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव
TV Rating Policy 2026 के लागू होने से देश के ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में एक अहम मोड़ आया है। अब फोकस दर्शकों की संख्या को कृत्रिम रूप से बढ़ाने वाले मार्केटिंग हथकंडों से हटकर, सीधे कंटेंट की क्वालिटी पर होगा। इस पॉलिसी के तहत 'लैंडिंग पेज' जैसी तकनीकों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जिनका इस्तेमाल दर्शकों की संख्या (Viewership) को गलत तरीके से बढ़ाने के लिए किया जाता था। अब ब्रॉडकास्टर्स को केवल बेहतर प्रोग्रामिंग के दम पर ही दर्शक जुटाने होंगे। इससे कंपनियों को अपनी रणनीति, निवेश और बिजनेस मॉडल पर फिर से सोचना पड़ेगा।
'लैंडिंग पेज' बैन: कंटेंट ही राजा बनेगा
TV Rating Policy 2026 में 'लैंडिंग पेज' के इस्तेमाल को रेटिंग के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। दरअसल, 'लैंडिंग पेज' एक ऐसी तकनीक है जिसमें सेट-टॉप बॉक्स को किसी चैनल पर ऑटोमेटिक ट्यून कर दिया जाता था, ताकि ग्रॉस रेटिंग पॉइंट्स (GRPs) और विज्ञापन रेवेन्यू को बढ़ाया जा सके। अब इन्हें केवल मार्केटिंग टूल माना जाएगा और इनके बारे में जानकारी देना अनिवार्य होगा। इस तरह, अब ये तरीके दर्शकों की संख्या को आर्टिफीशियली नहीं बढ़ा पाएंगे। इसके साथ ही, मापन पैनल का दायरा बढ़ाकर कम से कम 80,000 घर (और लक्ष्य 1,20,000 तक) करने और OTT व कनेक्टेड टीवी (CTV) के डेटा को शामिल करने से यह तय होगा कि दर्शक क्या देखना पसंद कर रहे हैं, न कि सिर्फ चैनल की प्लेसमेंट कितनी अच्छी है। इससे ब्रॉडकास्टर्स को ऐसे कंटेंट पर ध्यान देना होगा जो दर्शकों को आकर्षित करे।
मापन प्रणाली में सुधार: प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता
यह पॉलिसी ऐसे समय आई है जब भारत का मीडिया सेक्टर तेजी से डिजिटल बदलाव से गुजर रहा है। डिजिटल विज्ञापन का हिस्सा बढ़कर 2025-2026 तक 60-64% तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि टीवी विज्ञापन रेवेन्यू स्थिर या घट रहा है। कनेक्टेड टीवी (CTV) की बढ़ती लोकप्रियता दर्शकों की बदलती आदतों को दर्शाती है। टीवी रेटिंग सिस्टम की विश्वसनीयता पहले से ही मैनिपुलेशन और अपर्याप्त सैंपलिंग के कारण सवालों के घेरे में थी, जिससे विज्ञापनदाताओं का भरोसा कम हुआ था। इस भरोसे को फिर से जीतने के लिए, पॉलिसी ने रेटिंग एजेंसियों के लिए न्यूनतम नेट वर्थ को ₹20 करोड़ से घटाकर ₹5 करोड़ कर दिया है। इससे नई कंपनियों को बाजार में उतरने का मौका मिलेगा और मौजूदा एकमात्र एजेंसी, ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। BARC, जो पहले 55,000 से अधिक घरों का उपयोग करती थी, को अब छह महीने के भीतर 80,000 घरों तक विस्तार करना होगा - यह एक बड़ी चुनौती है। सख्त गवर्नेंस नियमों के तहत, एजेंसी के बोर्ड में कम से कम 50% स्वतंत्र निदेशक होने चाहिए, जो निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे।
आगे की राह: अनुपालन और खर्च
इस बड़े फेरबदल से स्थापित खिलाड़ियों, खासकर BARC के सामने कई चुनौतियां होंगी। BARC को 30 दिनों के भीतर पंजीकरण के लिए फिर से आवेदन करना होगा और छह महीने में नए पैनल आकार तक पहुंचना होगा। इस वजह से रेटिंग जारी करने में देरी हो रही है, जिससे इंडस्ट्री के लिए डेटा गैप की स्थिति बन सकती है। पैनल का विस्तार, नई तकनीकें अपनाना और सख्त ऑडिट व गवर्नेंस नियमों का पालन करने से रेटिंग एजेंसियों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। 80,000 मीटर तक सालाना विस्तार करना लॉजिस्टिक्स और फाइनेंस के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण है। नियमों के उल्लंघन पर ग्रेडिड पेनल्टी, जैसे रेटिंग सस्पेंड होना या बैंक गारंटी खोना, अनुपालन जोखिम को बढ़ाती है। चौथी बार उल्लंघन करने पर रजिस्ट्रेशन रद्द भी हो सकता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पेनल्टी से होने वाले वित्तीय नुकसान की भरपाई नहीं करेगा, जिससे अनुपालन का पूरा बोझ एजेंसियों पर ही आएगा। मार्केट अनिश्चितता का सामना कर रहा है क्योंकि सिस्टम नए नियमों के अनुकूल हो रहे हैं। BARC का FY25 में नेट प्रॉफिट ₹15.7 करोड़ पर आ गया है, ऐसे में नई कंपनियों को स्थापित इंफ्रास्ट्रक्चर और संबंधों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
भविष्य की ओर: जवाबदेही और इनोवेशन
TV Rating Policy 2026 से अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता आने की उम्मीद है, जो ब्रॉडकास्टर्स को कंटेंट इनोवेशन की ओर धकेलेगी। क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म मापन की ओर बढ़ना, जैसे BARC | Nielsen ONE Ads का टीवी और डिजिटल डेटा को एकीकृत करना, इंडस्ट्री के मर्जिंग मीडिया एनवायरनमेंट के अनुकूल ढलने का संकेत है। डिजिटल की बढ़ती मांग के बीच पारंपरिक टीवी विज्ञापन पर दबाव है, लेकिन इसकी मास रीच के कारण सटीक ऑडियंस मापन महत्वपूर्ण बना हुआ है। पॉलिसी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मौजूदा एजेंसियां कितनी जल्दी नियमों का पालन करती हैं और नई कंपनियां कितनी प्रभावी ढंग से नियामक और परिचालन मांगों को पूरा कर पाती हैं। अंततः, यह पॉलिसी भारत में मीडिया के मूल्य को मापने और उसका व्यापार करने के तरीके को नया आकार देगी।