भारत की दिग्गज स्ट्रीमिंग और टेक कंपनियों ने 'India Connected TV & FAST Council' बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इस काउंसिल का मकसद CTV मार्केट में डेटा की बिखरी हुई व्यवस्था को सुधारना और सरकार के नए रेगुलेशंस के सामने इंडस्ट्री की बात मजबूती से रखना है।
इंडस्ट्री में क्यों पड़ी काउंसिल की जरूरत?
डिजिटल टेलीविजन एडवरटाइजिंग और कंटेंट कंजम्पशन के मामले में भारत का मार्केट काफी तेजी से बढ़ा है, लेकिन फिलहाल इसमें ट्रेडिशनल टीवी जैसा कोई सेंट्रलाइज्ड मेजरमेंट सिस्टम नहीं है। इस कमी को दूर करने के लिए Runn Media Labs ने एक राउंड-टेबल मीटिंग बुलाई, जिसमें JioStar, Zee, Magnite, The Trade Desk और CloudTV जैसे दिग्गज शामिल हुए।
क्या होगा फायदा?
काउंसिल का मुख्य लक्ष्य डेटा प्राइवेसी और ऑडियंस मेजरमेंट के लिए एक मानक (Standard) तय करना है। जब डेटा स्टैंडर्डाइज हो जाएगा, तो एडवरटाइजर्स के लिए ROI को ट्रैक करना आसान होगा। इससे पूरे इकोसिस्टम में रेवेन्यू के नए और बेहतर रास्ते खुलेंगे, जो कंटेंट प्रोवाइडर्स और प्लेटफॉर्म ओनर्स के लिए फायदेमंद साबित होगा।
सरकारी रेगुलेशन का प्रभाव
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत सरकार FAST (Free Ad-Supported Streaming Television) और ATLD (Application-based Linear Television Distribution) के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार कर रही है। इंडस्ट्री चाहती है कि आने वाले सरकारी नियम केवल पुराने ब्रॉडकास्ट मॉडल्स पर आधारित न हों, बल्कि आधुनिक डिजिटल डिस्ट्रिब्यूशन की जरूरतों को भी समझें।
रिस्क और चुनौतियां
फिलहाल यह पहल शुरुआती स्टेज पर है। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि अलग-अलग कंपनियों के बीच आम सहमति बनाना और सरकारी फ्रेमवर्क के साथ तालमेल बिठाना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। फिलहाल किसी भी तरह की औपचारिक नियामक मंजूरी (Regulatory Approval) नहीं मिली है, इसलिए इस काउंसिल के गठन की गति और निष्पक्षता पर नजर रखना जरूरी होगा।
