Gaming Market: भारत का गेमिंग सेक्टर **₹14,344 करोड़** के पार, कमाई का जरिया अब भी एक चुनौती

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gaming Market: भारत का गेमिंग सेक्टर **₹14,344 करोड़** के पार, कमाई का जरिया अब भी एक चुनौती

भारत का नॉन-बेटिंग गेमिंग सेक्टर तेजी से बढ़ते हुए **₹14,344 करोड़** के स्तर पर पहुंच गया है। **53.5 करोड़** गेमर्स के बावजूद, उद्योग की निर्भरता अभी भी विज्ञापन रेवेन्यू पर बनी हुई है, जो निवेशकों के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है।

बाजार का वर्तमान हाल

Dentsu India और IWMBuzz Media की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का प्योर-प्ले गेमिंग मार्केट ₹14,344 करोड़ की वैल्यूएशन छू चुका है। देश में 53.5 करोड़ एनुअल गेमर्स हैं, जो गेमिंग इकोसिस्टम की ताकत को दर्शाते हैं। हालांकि, इस ग्रोथ के पीछे की सच्चाई थोड़ी अलग है।

विज्ञापन पर निर्भरता और जोखिम

कुल ₹14,344 करोड़ की कमाई में से ₹8,705 करोड़ केवल विज्ञापन (Advertising) से आए हैं। इसका मतलब है कि इंडस्ट्री की 60% से ज्यादा कमाई कॉर्पोरेट कंपनियों के मार्केटिंग बजट पर निर्भर है, न कि सीधे गेमर्स के खर्च पर। दूसरी ओर, कंज्यूमर-पेड गेमिंग से ₹5,239 करोड़ और ई-स्पोर्ट्स व अन्य स्रोतों से ₹401 करोड़ की कमाई हुई है। निवेशकों के लिए यह एक रिस्क है, क्योंकि एडवर्टाइजिंग बजट आर्थिक मंदी के दौरान सबसे पहले प्रभावित होते हैं।

ओरिजिनल IP और मोनेटाइजेशन की चुनौती

देश में 33.2 करोड़ एक्टिव गेमर्स होने के बावजूद, भारतीय स्टूडियोज अभी तक ग्लोबल लेवल का ओरिजिनल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) बनाने में संघर्ष कर रहे हैं। फिलहाल, सिर्फ 10.9 करोड़ गेमर्स ही ऐसे हैं जो गेमिंग पर पैसे खर्च करते हैं।

इंडस्ट्री के सामने असली चुनौती गेमर्स की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि मौजूदा यूजर्स को 'पेइंग यूजर्स' में बदलना है। भविष्य में गेमिंग स्टूडियोज की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितना प्रीमियम और ओरिजिनल कंटेंट तैयार कर पाते हैं ताकि विज्ञापन पर निर्भरता को कम किया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.