भारत का पेड Direct-to-Home (DTH) सेक्टर गहरे संकट से गुजर रहा है। जून 2026 तक एक साल में कुल **75.1 लाख** यूजर्स ने अपनी सर्विस बंद कर दी है, जिससे एक्टिव सब्सक्राइबर्स की संख्या घटकर **4.85 करोड़** रह गई है। यह **13.4%** की बड़ी गिरावट सीधे तौर पर OTT और फ्री विकल्पों की ओर बढ़ते ग्राहकों का संकेत है।
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, DTH इंडस्ट्री के लिए यह साल बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। जून 2025 में सब्सक्राइबर्स की संख्या 5.60 करोड़ थी, जो अब गिरकर 4.85 करोड़ पर आ गई है।
क्यों छोड़ रहे हैं लोग DTH?
इसके पीछे मुख्य कारण ब्रॉडबैंड का तेजी से विस्तार और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता है। उपभोक्ता अब मासिक सब्सक्रिप्शन के बजाय 'फ्री-टू-एयर' विकल्पों जैसे कि सरकारी 'DD Free Dish' को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इस बदलाव की आंच ब्रॉडकास्टिंग के अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ी है, जहां अप्रैल-जून तिमाही में प्राइवेट एफएम रेडियो के विज्ञापन रेवेन्यू में 9.1% की गिरावट आई है और यह ₹376.16 करोड़ रहा है।
कंपनियों की वित्तीय सेहत
सब्सक्राइबर्स के जाने से कंपनियों का बिजनेस मॉडल डगमगा गया है। Dish TV India ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में ₹807.4 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है। वहीं, बाजार में 30.56% हिस्सेदारी रखने वाली Tata Play को भी ₹551 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा है।
आगे क्या?
कंपनियां अब खुद को बचाने के लिए हाइब्रिड मॉडल अपना रही हैं, जिसमें सैटेलाइट टीवी के साथ इंटरनेट सर्विसेज को जोड़ा जा रहा है। Bharti Airtel इस दिशा में आगे दिख रही है, जिसके IPTV सेगमेंट में अब 40 लाख से ज्यादा यूजर्स हो गए हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या ये कंपनियां अपने पुराने ग्राहकों को 'स्मार्ट' प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर मुनाफे में वापसी कर पाएंगी या नहीं।
