'ऑरेंज इकोनॉमी' पर सरकार का फोकस
भारत सरकार 'ऑरेंज इकोनॉमी' को देश की अगली बड़ी ग्रोथ स्टोरी बनाने की तैयारी में है। इस पहल का मकसद कंटेंट क्रिएशन, गेमिंग, डिजाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी जैसे क्रिएटिव सेक्टर्स को बढ़ावा देना है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हों। बजट 2026 में इस क्षेत्र के लिए ₹450 करोड़ का विशेष आवंटन किया गया है। इस योजना का एक बड़ा हिस्सा देशभर के स्कूलों और कॉलेजों में 15,000 कंटेंट क्रिएटर लैब्स की स्थापना है, जिसका लक्ष्य 2030 तक करीब 20 लाख प्रोफेशनल्स को ट्रेंड करना है।
भरोसे का भारी संकट
हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना की नींव एक बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। वर्ल्ड वैल्यूज सर्वे (World Values Survey) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में आपसी भरोसे का स्तर खतरनाक रूप से गिर गया है। 2023 में, केवल 17% भारतीयों का मानना था कि 'अधिकांश लोग भरोसेमंद हैं', जो 2000 के दशक की शुरुआत के 39% से कहीं कम है। यह विश्वास की कमी क्रिएटिव सेक्टर के विकास में सीधा रोड़ा बन रही है, क्योंकि यह फीडबैक, कोलाबरेशन और काम की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
साउथ कोरिया से सबक और नई चुनौतियां
सरकार ने इस सेक्टर में भारी निवेश किया है, लेकिन कम सामाजिक विश्वास के कारण लोगों के बीच सहयोग और नए विचारों को पनपने में मुश्किल आ रही है। दक्षिण कोरिया ने 'Hallyu Wave' (K-Pop, K-Dramas) के जरिए अपनी क्रिएटिव इकोनॉमी को ग्लोबल मंच पर पहुंचाया, लेकिन भारत का रास्ता और भी कठिन है। आज का ग्लोबल मार्केट ज्यादा बंटा हुआ है और इसमें भू-राजनीतिक चुनौतियां भी ज्यादा हैं।
AI का बढ़ता खतरा और अन्य मुश्किलें
इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता दखल भी एक दोधारी तलवार साबित हो रहा है। AI क्रिएटिव काम में मदद तो कर सकता है, लेकिन यह इंसानी क्रिएटर्स की जगह भी ले सकता है। अनुमान है कि AI-जनरेटेड कंटेंट से म्यूजिक क्रिएटर्स का रेवेन्यू 24% और ऑडियो-विजुअल वर्कर्स का 21% तक घट सकता है। डिजिटल डिवाइड और प्लेटफॉर्म पर निर्भरता भी क्रिएटर्स के लिए अस्थिर कमाई का सबब बन रही है।
भरोसा ही है सफलता की कुंजी
कुल मिलाकर, बजट 2026 में 'ऑरेंज इकोनॉमी' के लिए किया गया निवेश एक रणनीतिक कदम है, लेकिन इसकी असली सफलता गहरी सामाजिक समस्याओं को दूर करने पर निर्भर करेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट डेवलपमेंट के साथ-साथ, भरोसे का माहौल बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके बिना, भारी-भरकम वित्तीय मदद के बावजूद, भारत का क्रिएटिव सेक्टर अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाएगा।