Union Budget 2026-27: 'ऑरेंज इकोनॉमी' को बड़ा बूस्ट! टैलेंट पर फोकस, पर IP और AI की चुनौतियाँ

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Union Budget 2026-27: 'ऑरेंज इकोनॉमी' को बड़ा बूस्ट! टैलेंट पर फोकस, पर IP और AI की चुनौतियाँ
Overview

भारत सरकार के यूनियन बजट 2026-27 ने 'ऑरेंज इकोनॉमी' यानी रचनात्मकता, संस्कृति और टेक्नोलॉजी के संगम को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बजट में AVGC-XR (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स - एक्सटेंडेड रियलिटी) सेक्टर में टैलेंट डेवलपमेंट पर खास जोर दिया गया है, जिसके लिए बड़ी राशि आवंटित की गई है और इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट भी बढ़ाया गया है।

'ऑरेंज इकोनॉमी' की राह में बजट का अहम रोल

यूनियन बजट 2026-27 में 'ऑरेंज इकोनॉमी' को देश के विकास का एक मुख्य इंजन बनाने की परिकल्पना की गई है। क्रिएटिव इंडस्ट्रीज को स्किल्ड एम्प्लॉयमेंट और एक्सपोर्ट के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए, सरकार ने AVGC-XR सेक्टर में टैलेंट डेवलपमेंट के लिए ₹250 करोड़ का आवंटन किया है। इसका मकसद इस क्षमता को व्यवस्थित तरीके से और बड़े पैमाने पर विकसित करना है।

इस पहल के तहत, 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित किए जाएंगे। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT), मुंबई, इस योजना का समर्थन करेगा। यह एक व्यापक दृष्टिकोण है जिसका लक्ष्य इंडस्ट्री की मांगों और उभरती टेक्नोलॉजी के साथ तालमेल बिठाकर राष्ट्रीय क्रिएटिव टैलेंट पाइपलाइन तैयार करना है। यह सेक्टर पहले से ही काफी बड़ा है, जिसका मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) सेक्टर 2024 में लगभग ₹2.5 लाख करोड़ का था। अनुमान है कि अकेले AVGC सेक्टर 2030 तक $26 बिलियन तक पहुंच सकता है, कुछ अनुमान इसे $100 बिलियन तक भी ले जाते हैं।

ग्रोथ के इंजन: लाइव एंटरटेनमेंट और गेमिंग

भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी के खास सेगमेंट में तेजी देखी जा रही है। लाइव एंटरटेनमेंट मार्केट, जो 2024 में ₹100 बिलियन से अधिक का था, टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी और लोकल एम्प्लॉयमेंट में बड़ा बूस्ट दे रहा है। इसी तरह, वीडियो गेमिंग मार्केट, जिसका अनुमान 2024 में ₹23,200 करोड़ लगाया गया है, मोबाइल-फर्स्ट और वर्नाक्युलर कंजम्पशन प्रोफाइल के कारण बड़े पैमाने पर ग्रोथ इंजन बना हुआ है।

इस विस्तार का सबसे बड़ा कारण भारत का डेमोग्राफिक एडवांटेज है: 65% से ज्यादा आबादी 35 साल से कम है। डिजिटल पैठ और सस्ती इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ, यह सेक्टर एक कंटेंट-कंज्यूमिंग देश से ग्लोबल आईपी (Intellectual Property) का क्रिएटर और एक्सपोर्टर बनने की राह पर है।

AI: एक दोधारी तलवार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एनीमेशन, VFX और गेमिंग वर्कफ्लो को पूरी तरह से बदल रहा है। इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि AI कुछ एनीमेशन प्रक्रियाओं में प्रोडक्शन कॉस्ट को 25-40% तक कम कर सकता है और वर्कफ्लो को तेज कर सकता है, जिससे छोटे स्टूडियो भी ग्लोबल लेवल पर मुकाबला कर पाएंगे। AI टूल्स प्री-विज़ुअलाइज़ेशन से लेकर एसेट क्रिएशन और पोस्ट-प्रोडक्शन तक के कामों को आसान बना रहे हैं।

हालांकि, इस टेक्नोलॉजिकल क्रांति के साथ गंभीर चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं। AI-जेनरेटेड कंटेंट के लिए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) को लेकर अनिश्चितता, नौकरियों पर संभावित खतरा और ग्लोबल AI प्लेटफॉर्म्स का मार्केट पर दबदबा चिंता का विषय है। भारत का कॉपीराइट एक्ट 1957, जो AI के आने से पहले का है, ऑथरशिप और ओनरशिप को लेकर स्पष्टता नहीं रखता, जिससे क्रिएटर्स और बिजनेसेज के लिए एक जटिल माहौल पैदा हो गया है।

वेंचर कैपिटल और धीमी गति का निवेश

भारत का टेक्नोलॉजिकल लैंडस्केप हाई-इनोवेशन और लॉन्ग-जेस्टेशन स्टार्टअप्स को सपोर्ट कर रहा है, जिसमें 'पेशेंस कैपिटल' (धैर्यपूर्ण पूंजी) की ओर रुझान बढ़ रहा है। वेंचर कैपिटल फर्म्स डीप-टेक इन्वेस्टिंग के लिए विशेष फंड लॉन्च कर रही हैं, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं। इसके बावजूद, फाउंडर्स को फंडिंग एक्सेस करने में दिक्कतें आ रही हैं, क्योंकि लॉन्ग जेस्टेशन पीरियड (लंबा समय) इन्वेस्टर्स के लिए एक बड़ी बाधा है। क्रिएटिव इकोनॉमी, जो आईपी डेवलपमेंट और बदलते मार्केट डायनामिक्स पर निर्भर करती है, के लिए अक्सर ज्यादा लंबे समय के रिटर्न की जरूरत होती है।

IP की अनिश्चितता और लीगल गैप

सबसे बड़ा रिस्क इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) डोमेन में है। भारत का मौजूदा लीगल फ्रेमवर्क AI की जनरेटिव क्षमताओं के साथ तालमेल बिठाने में संघर्ष कर रहा है, जिससे ओनरशिप और इन्फ्रिंजमेंट (अधिकार हनन) के मुद्दे अनसुलझे हैं। मौजूदा कानून इंसानी क्रिएटर्स के लिए बनाए गए थे, AI सिस्टम्स के लिए नहीं, जिससे एक 'लीगल ग्रे एरिया' बन गया है।

इसके अलावा, IP राइट्स का एनफोर्समेंट (प्रवर्तन), हालांकि सुधर रहा है, पायरेसी और काउंटरफिटिंग (नकली सामान) जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, जो इन्वेस्टमेंट को हतोत्साहित कर सकते हैं। AI द्वारा अनजाने में मौजूदा कॉपीराइट्स या पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन करने वाले कंटेंट तैयार करने की संभावना, बिना स्पष्ट देनदारी के, क्रिएटर्स और बिजनेसेज के लिए एक बड़ा खतरा है। मजबूत IP सुरक्षा और AI के उपयोग पर स्पष्ट दिशानिर्देशों के बिना, ओरिजिनल, हाई-वैल्यू इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी डेवलप करने का प्रोत्साहन कम हो जाता है।

एम्बिशन बनाम एग्जीक्यूशन

सरकार की पॉलिसी का इरादा स्पष्ट है, लेकिन इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के एग्जीक्यूशन (क्रियान्वयन) में प्रैक्टिकल बाधाएं हैं। क्रिएटिव क्षमताओं को इंडस्ट्री की बदलती मांग के अनुरूप बढ़ाना होगा, और कैपिटल मार्केट्स को IP-इंटेंसिव क्रिएटिव वेंचर्स के लॉन्ग-जेस्टेशन पीरियड को स्वीकार करने में अधिक सहज होना होगा। AVGC सेक्टर के लिए 2030 तक दो मिलियन स्किल्ड प्रोफेशनल्स की अनुमानित आवश्यकता को पूरा करना एक चुनौती होगी, खासकर AI-संचालित वर्कफ्लो शिफ्ट्स के संदर्भ में। ग्लोबल AI प्लेटफॉर्म्स भी एक कॉम्पिटिटिव चुनौती पेश करते हैं, जो मार्केट शेयर पर हावी हो सकते हैं और कंटेंट क्रिएशन स्टैंडर्ड्स को प्रभावित कर सकते हैं।

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