भारत में माइक्रोड्रामा ऐप्स का दौर बदल रहा है। अब कंपनियां ग्राहकों की संख्या बढ़ाने के बजाय ऐसे सब्सक्राइबर्स पर ध्यान दे रही हैं जो भुगतान करें। Pocket FM का 'Pocket TV' बंद होना इस बात का संकेत है कि अब OTT दिग्गजों के सामने टिक पाना मुश्किल हो रहा है।
भारत का माइक्रोड्रामा इंडस्ट्री अब एक नए और अधिक अनुशासित दौर में प्रवेश कर चुका है। एक समय था जब यह सेक्टर सिर्फ यूजर बेस बढ़ाने की होड़ में था। आंकड़ों पर गौर करें तो इस इंडस्ट्री के पास लगभग 10 करोड़ यूजर्स हैं और 25 करोड़ से ज्यादा ऐप डाउनलोड्स हो चुके हैं। लेकिन असली चुनौती यह है कि कुल डाउनलोड्स और वास्तव में भुगतान करने वाले सक्रिय सब्सक्राइबर्स के बीच एक बहुत बड़ा अंतर है।
क्यों बंद हुआ Pocket TV?
हाल ही में Pocket FM द्वारा अपने 5 महीने पुराने प्रयोग 'Pocket TV' को बंद करने का फैसला इस बदलाव का स्पष्ट उदाहरण है। कंपनी ने माना कि केवल नए डाउनलोड्स बढ़ाना अब पर्याप्त नहीं है, बल्कि ग्राहकों को बनाए रखना (Retention) असली चुनौती है। अब कंपनियां 'वैनिटी मेट्रिक्स' को छोड़कर असली बिजनेस हेल्थ पर ध्यान दे रही हैं।
डार्क पैटर्न और रेगुलेटरी रिस्क
कई प्लेटफॉर्म्स पर 'डार्क पैटर्न' का उपयोग करने के आरोप लग रहे हैं, जिसमें ग्राहकों को बिना मर्जी के सब्सक्रिप्शन में फंसाना या कैंसिलेशन को कठिन बनाना शामिल है। ऐसी रणनीतियां न केवल ग्राहकों का भरोसा तोड़ती हैं, बल्कि रेगुलेटरी जांच का दायरा भी बढ़ाती हैं।
बड़े प्लेयर्स से कड़ी टक्कर
इंडस्ट्री में अब एक बड़ा कंसोलिडेशन देखने को मिल रहा है। Amazon MX Player, JioHotstar और Zee Entertainment जैसे बड़े OTT खिलाड़ी अब अपने इकोसिस्टम में माइक्रोड्रामा कंटेंट को जोड़ रहे हैं। इन दिग्गजों के पास बेहतर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, मोटी पूंजी और एडवांस्ड रिकमेंडेशन टेक्नोलॉजी है, जिससे छोटे ऐप्स के लिए अपना मार्केट शेयर बचाना मुश्किल होता जा रहा है। आने वाले समय में, केवल वही प्लेटफॉर्म टिक पाएंगे जो विज्ञापन के बजाय वफादार सब्सक्राइबर्स का आधार बना सकेंगे।
