भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव रखा है, जिससे आम नागरिकों और क्रिएटर्स द्वारा शेयर की जाने वाली 'समाचार और सामयिकी' (news and current affairs) की सामग्री पर भी सरकारी निगरानी का दायरा बढ़ जाएगा। यह कदम व्यक्तिगत क्रिएटर्स और आम नागरिकों को औपचारिक प्रकाशकों (publishers) के समान मानेगा। इस विस्तार से कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अनुपालन (compliance) की मांगें और कंटेंट हटाने की आवश्यकताएं बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ब्रांड स्वतंत्र आवाजों के साथ काम करने में हिचकिचा सकते हैं और क्रिएटर इकोनॉमी के लिए निवेश के दृष्टिकोण को बदल सकते हैं, जो भारत के डिजिटल विज्ञापन बाजार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जिसके 2030 तक 22 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। वहीं, क्रिएटर इकोनॉमी के वर्तमान 20-25 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 100-125 अरब डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है, जो 10-15% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ रहा है।
प्रस्तावित बदलाव IT Rules के पार्ट III के दायरे का विस्तार करेंगे, जो पहले केवल पंजीकृत समाचार प्रकाशकों पर लागू होता था। अब, ऑनलाइन 'समाचार और सामयिकी' साझा करने वाले इंटरमीडियरी और व्यक्तियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसका मतलब है कि YouTubers, Instagram influencers, podcasters और राजनीतिक या नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करने वाले नागरिक भी इन नियमों के दायरे में आ सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे पेशेवर मीडिया।
अपने 'सेफ हार्बर' (safe harbour) सुरक्षा को बनाए रखने के लिए, इंटरमीडियरी को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) से सलाह का पालन करना होगा। सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) को भी कंटेंट ब्लॉक करने की सिफारिश करने और यदि किसी शिकायत को अंतर-विभागीय समिति द्वारा बरकरार रखा जाता है तो क्रिएटर्स को माफी मांगने या बदलाव करने का आदेश देने की शक्ति मिल सकती है।
यह नियामक कदम सरकार द्वारा ऑनलाइन कंटेंट पर नियंत्रण बढ़ाने के पिछले प्रयासों जैसा है, जैसे कि ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज (रेगुलेशन) बिल, 2024, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था। अधिकारियों द्वारा जारी की गई चेतावनियाँ और स्पष्टीकरण कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक अनिश्चितता पैदा करते हैं। उदाहरण के लिए, 18 मार्च, 2026 को कॉमेडियन पुलकित मणि (Pulkit Mani) द्वारा बनाए गए एक व्यंग्यात्मक इंस्टाग्राम रील को ब्लॉक कर दिया गया था, जो उपयोगकर्ता-जनित कंटेंट पर सरकार के रुख को दर्शाता है।
दूसरी ओर, निफ्टी IT इंडेक्स, जो भारत के व्यापक टेक्नोलॉजी सेक्टर को ट्रैक करता है, हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े डर और व्यापक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण यह इंडेक्स साल-दर-तारीख (YTD) लगभग 25% तक गिर चुका है। वर्तमान में, निफ्टी IT का वैल्यूएशन लगभग ₹26.13 ट्रिलियन है, जिसका P/E रेशियो (Price-to-Earnings Ratio) लगभग 22.4 है।
आधिकारिक प्रकाशकों से संबंधित नहीं होने वाले कंटेंट को ब्लॉक करने के आदेशों की सिफारिश करने की क्षमता सहित विस्तारित शक्तियों से व्यापक सेल्फ-सेंसरशिप का डर पैदा होता है। क्रिएटर्स सरकारी प्रतिक्रिया के जोखिम के कारण आलोचनात्मक या व्यंग्यात्मक सामग्री बनाने से कतरा सकते हैं। इस तरह के बढ़ते नियामक दायरे का पैटर्न अभिव्यक्ति को दबा सकता है।
क्रिएटर इकोनॉमी की वृद्धि को एक ऐसे नियामक माहौल पर निर्भर करता है जो अभिव्यक्ति और नवाचार के लिए जगह के साथ-साथ उचित निगरानी को संतुलित करे। डिजिटल कंटेंट पर सरकारी नियंत्रण में वृद्धि भारत के भविष्य के डिजिटल विस्तार के इस प्रमुख क्षेत्र में निवेश को हतोत्साहित कर सकती है। IT नियम में प्रस्तावित संशोधन वर्तमान में 29 अप्रैल, 2026 तक सार्वजनिक टिप्पणी के लिए खुले हैं।
