'Create in India' मिशन: क्या हैं लक्ष्य?
'Create in India' मिशन का विज़न अगले 25 साल में भारत को क्रिएटिव सेक्टर्स में दुनिया का सिरमौर बनाना है। इसका मकसद देश की 'ऑरेंज इकोनॉमी' को ज़बरदस्त मज़बूती देना है, जिसमें मीडिया, मनोरंजन, एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स (VFX), गेमिंग (AVGC-XR) और डिजिटल कंटेंट जैसे सभी क्रिएटिव बिज़नेस शामिल हैं। यूनियन बजट 2026-27 में भी इन सेक्टर्स को आर्थिक विकास के मुख्य इंजन के तौर पर पहचाना गया है। यह मिशन भारत को सिर्फ एक सेवा प्रदाता (service provider) की भूमिका से आगे ले जाकर, ग्लोबल क्रिएटिव आउटपुट के लिए एक पसंदीदा प्लेटफॉर्म बनाना चाहता है।
मिशन के दो मज़बूत स्तंभ: डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट
इस मिशन की कामयाबी के लिए दो चीजें सबसे ज़रूरी हैं: भारत का तेज़ी से बढ़ता डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और देश की विशाल, कुशल आबादी। देश भर में 5G कनेक्टिविटी और इंटरनेट की पैठ कंटेंट बनाने और फैलाने के लिए ज़रूरी डिजिटल रास्ते तैयार करती है। हुनर को निखारने के लिए सरकार मुंबई में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) की स्थापना कर रही है। साथ ही, 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब खोली जाएंगी। इसका लक्ष्य 2030 तक इंडस्ट्री की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए करीब 20 लाख कुशल प्रोफेशनल्स तैयार करना है।
ग्लोबल स्टेज पर भारत: कॉम्पिटिशन और मौके
'Create in India' मिशन दुनिया की करीब 2 ट्रिलियन डॉलर सालाना की क्रिएटिव इकोनॉमी में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने का इरादा रखता है, जिसमें दुनिया भर में 5 करोड़ से ज़्यादा लोग काम करते हैं। एनीमेशन और VFX के क्षेत्र में भारत पश्चिमी देशों के मुकाबले 40-60% तक सस्ता है, जो इसका बड़ा फायदा है। WAVES 2025 जैसे इवेंट्स पहले ही WaveX स्टार्टअप इनोवेशन प्लेटफॉर्म और WAVES Bazaar राइट्स मार्केटप्लेस जैसे नतीज़े दे चुके हैं। ये कोशिशें क्रिएटर्स को सपोर्ट करने और बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) डील्स को आसान बनाने के लिए हैं। अनुमान है कि 2030 तक डिजिटल कंटेंट, एनीमेशन और विज़ुअल इफेक्ट्स का बाज़ार अरबों डॉलर तक पहुंच जाएगा।
रास्ते की बाधाएं: कार्यान्वयन की चुनौतियां
हालांकि, इस मिशन के लक्ष्यों को हासिल करने में कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं। UNCTAD के अनुसार, विकासशील देशों को अक्सर क्रिएटिव इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी मज़बूत सांख्यिकीय प्रणालियों, संस्थागत ढांचों और वित्तीय संसाधनों को स्थापित करने में मुश्किल आती है। 2030 तक 20 लाख AVGC प्रोफेशनल्स को ट्रेनिंग देने की योजना मौजूदा शैक्षिक ढांचे पर भारी पड़ सकती है, जिससे स्किल डेवलपमेंट की गुणवत्ता और स्केल पर सवाल उठते हैं। ग्लोबल क्रिएटिव दिग्गजों से मुकाबला करने के लिए सिर्फ लागत में कमी काफी नहीं, बल्कि मज़बूत IP (Intellectual Property) सुरक्षा और मार्केट एक्सेस की रणनीतियाँ भी ज़रूरी हैं। एक बड़ा पेंच AI (Artificial Intelligence) का इंटीग्रेशन है। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने AI ट्रेनिंग डेटा से उत्पन्न होने वाले कॉपीराइट, सहमति और मुआवजे जैसे जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए "टेक्नो-लीगल समाधानों" की वकालत की है। लेकिन इन पर सहमति बनाना और प्रभावी कार्यान्वयन एक बड़ी चुनौती है, जो क्रिएटर्स के योगदान के मूल्य को कम कर सकता है। साथ ही, देश के सभी हिस्सों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की एकसमान उपलब्धता भी एक लगातार चिंता का विषय है।
भविष्य का नज़रिया: ग्रोथ और रोज़गार
'Create in India' मिशन को 'डिजिटल इंडिया' और यूनियन बजट 2026-27 जैसे व्यापक राष्ट्रीय एजेंडों के तहत रणनीतिक रूप से जोड़ा गया है। अनुमान है कि भारत का मीडिया एंड एंटरटेनमेंट (M&E) सेक्टर, जिसका मूल्य 2024 में करीब ₹2.5 ट्रिलियन था, 2027 तक बढ़कर ₹3.06 ट्रिलियन हो जाएगा। डिजिटल इकोनॉमी का GDP में योगदान भी बढ़ेगा। इस रणनीतिक कदम का मकसद सिर्फ़ रोज़गार पैदा करना नहीं, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर और आर्थिक विविधीकरण को भी मज़बूत करना है।