भारत का विज्ञापन बाज़ार धड़ाम से बढ़ा: डिजिटल में 149% उछाल, टीवी धराशायी! जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर!

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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत का विज्ञापन बाज़ार धड़ाम से बढ़ा: डिजिटल में 149% उछाल, टीवी धराशायी! जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर!
Overview

भारत के विज्ञापन बाज़ार में नाटकीय रूप से बदलाव आया है, डिजिटल प्लेटफॉर्म अब विकास का मुख्य इंजन बन गए हैं। जनवरी से सितंबर 2025 तक डिजिटल विज्ञापन इंप्रेशन में 149% की भारी बढ़ोतरी देखी गई, जो पिछले साल की 7% वृद्धि के बिल्कुल विपरीत है। इसके विपरीत, 2025 की पहली छमाही में टेलीविजन विज्ञापन में विज्ञापन वॉल्यूम में 10% की गिरावट आई। यह बदलाव ई-कॉमर्स और सेवा-उन्मुख ब्रांडों द्वारा संचालित है जो इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्मों पर प्रदर्शन और तेज़ कन्वर्ज़न को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो अब डिजिटल विज्ञापन इंप्रेशन का 64% हिस्सा रखते हैं। प्रोग्रामेटिक बाइंग 96% पर डिजिटल विज्ञापन डिलीवरी पर हावी है।

भारत का विज्ञापन परिदृश्य एक बड़े भूकंपीय बदलाव से गुजर रहा है

भारत का विज्ञापन परिदृश्य एक बड़े भूकंपीय बदलाव से गुजर रहा है, जिसमें डिजिटल चैनल पारंपरिक टेलीविजन विज्ञापन को तेजी से पीछे छोड़ रहे हैं। नए आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी से सितंबर 2025 के बीच डिजिटल विज्ञापन इंप्रेशन में एक चौंकाने वाली 149% की वृद्धि हुई है, जो 2024 में देखे गए 7% की मामूली वृद्धि से काफी तेज है। यह उछाल डिजिटल को विज्ञापन विकास का मुख्य इंजन बनाने का संकेत देता है, जिसमें ई-कॉमर्स और सेवा-आधारित व्यवसायों का बड़ा योगदान है।

डिजिटल का अनस्टॉपेबल राइज़

डिजिटल विज्ञापन की विस्फोटक वृद्धि का मुख्य कारण इसका प्रदर्शन, पैमाना और तीव्र रूपांतरण (rapid conversions) प्रदान करने की क्षमता है। ई-कॉमर्स सबसे बड़ा डिजिटल विज्ञापन श्रेणी बनकर उभरा है, जिसने 96% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। सेवाएँ, शिक्षा, सॉफ्टवेयर और फैशन-लिंक्ड ई-कॉमर्स श्रेणियों में भी महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है। विज्ञापन एजेंसियों का कहना है कि नए जमाने के स्टार्टअप अपने विकास के लिए लगभग पूरी तरह से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निर्भर करते हैं। यह आक्रामक कदम ऑनलाइन उपभोक्ताओं के लिए प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा रहा है।

टेलीविज़न की बदलती भूमिका

इसके बिल्कुल विपरीत, 2025 की पहली छमाही में टेलीविजन विज्ञापन की मात्रा में 10% की कमी आई। टीवी पर खर्च अभी भी फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) श्रेणियों जैसे कि खाद्य और पेय पदार्थ, व्यक्तिगत देखभाल और घरेलू उत्पादों तक सीमित है। हालाँकि टीवी अभी भी रोजमर्रा के उपभोग वाले ब्रांडों के लिए एक मास-रीच माध्यम है, लेकिन डिजिटल प्लेटफार्मों की तुलना में इसकी उच्च प्रवेश लागत (higher entry costs) कई विज्ञापनदाताओं के लिए एक बड़ी बाधा बन रही है।

विकसित होते प्लेटफॉर्म और बाइंग स्ट्रेटेजी

डिजिटल विज्ञापन के तंत्र भी बदल गए हैं, जिसमें प्रोग्रामेटिक बाइंग (programmatic buying) अब 96% डिजिटल विज्ञापन इंप्रेशन का हिस्सा है, जो 2024 में 88% था। यह स्वचालित, डेटा-संचालित लक्ष्यीकरण दृष्टिकोण (automated, data-driven targeting approach) विज्ञापनदाताओं की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से इंस्टाग्राम, सबसे बड़े लाभार्थी बने हैं, जिन्होंने 64% डिजिटल विज्ञापन इंप्रेशन पर कब्जा किया है। टेलीविजन का विज्ञापन परिदृश्य अपेक्षाकृत स्थिर है, जिसमें सामान्य मनोरंजन और समाचार चैनल विज्ञापन वॉल्यूम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं, जो लोकप्रिय शो और क्रिकेट जैसे लाइव स्पोर्ट्स से बढ़ते हैं।

विज्ञापनदाताओं के फ़ोकस में भिन्नता

विज्ञापनदाताओं के फ़ोकस में विचलन (divergence) एक बड़े कारक से प्रेरित हो रहा है, जो केवल डिजिटल विज्ञापनदाताओं (digital-only advertisers) की बढ़ती संख्या है। डिजिटल प्लेटफार्मों पर विशेष रूप से विज्ञापन करने वाले ब्रांडों की संख्या 2025 के पहले नौ महीनों में 149,000 से अधिक हो गई, जो पिछले साल लगभग 100,000 थी। इनमें ई-कॉमर्स फर्म, स्टार्टअप, फिनटेक और सॉफ्टवेयर ब्रांड शामिल हैं जो मापने योग्य रिटर्न (measurable returns) को प्राथमिकता देते हैं। हिंदुस्तान यूनिलीवर, रेकिट बेंकिज़र और नेस्ले जैसे पारंपरिक दिग्गज व्यापक दृश्यता (broad visibility) और ब्रांड सुदृढीकरण (brand reinforcement) के लिए टेलीविजन का उपयोग जारी रखते हैं, जहाँ वे दीर्घकालिक जागरूकता के लिए जन-audience पहुंच (mass-audience reach) का लाभ उठाते हैं।

भविष्य का दृष्टिकोण: एक द्वि-गति बाज़ार

भारत का विज्ञापन बाज़ार एक द्वि-गति (two-speed) मॉडल में व्यवस्थित होता दिख रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म विकास, प्रयोग और प्रदर्शन-संचालित रणनीतियों (performance-driven strategies) के लिए तेजी से पसंदीदा बन रहे हैं, खासकर ई-कॉमर्स और सेवाओं के लिए। टेलीविजन, हालाँकि अभी भी शक्तिशाली है, मास-मार्केट एफएमसीजी श्रेणियों के लिए एक विशेष विकल्प बनता जा रहा है जिसमें आदत, विश्वास और पुनरावृत्ति की आवश्यकता होती है। उद्योग विशेषज्ञ 2026 तक बाज़ार की गतिशीलता को इन्फ्लुएन्सर थकान (influencer fatigue) और बड़े-कार्यक्रम-आधारित विज्ञापन (big-event-led advertising) से आकार लेने की उम्मीद करते हैं।

प्रभाव

विज्ञापन खर्च में यह मूलभूत बदलाव मीडिया कंपनियों, डिजिटल विज्ञापन प्लेटफार्मों और पारंपरिक प्रसारकों के वित्तीय प्रदर्शन और बाजार मूल्यांकन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है। निवेशक संभवतः मजबूत डिजिटल पदचिह्न (strong digital footprints) और प्रदर्शन मेट्रिक्स (performance metrics) वाली कंपनियों का पक्ष लेंगे, जिससे पारंपरिक मीडिया शेयरों में अस्थिरता बढ़ सकती है। यह प्रवृत्ति कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए अपनी मार्केटिंग रणनीतियों और निवेश आवंटन को अनुकूलित करने की आवश्यकता का सुझाव देती है। प्रभाव रेटिंग: 8/10

कठिन शब्दों की व्याख्या

  • डिजिटल विज्ञापन इंप्रेशन (Digital Ad Impressions): डिजिटल विज्ञापन कितनी बार स्क्रीन पर प्रदर्शित हुए, इसका माप है। प्रत्येक प्रदर्शन को एक इंप्रेशन माना जाता है।
  • प्रोग्रामेटिक बाइंग (Programmatic Buying): डिजिटल विज्ञापन स्थान की स्वचालित खरीद और बिक्री, वास्तविक समय में होती है, जिसमें विशिष्ट दर्शकों को लक्षित करने के लिए डेटा और एल्गोरिदम का उपयोग किया जाता है।
  • ई-कॉमर्स (E-commerce): वस्तुओं या सेवाओं को इंटरनेट का उपयोग करके खरीदना और बेचना, और इन लेन-देन को निष्पादित करने के लिए धन और डेटा का हस्तांतरण।
  • FMCG (Fast-Moving Consumer Goods): रोज़मर्रा की वस्तुएँ जो जल्दी और अपेक्षाकृत कम लागत पर बेची जाती हैं, जैसे कि पैक्ड फ़ूड, पेय पदार्थ, प्रसाधन सामग्री और ओवर-द-काउंटर दवाएं।
  • स्टार्टअप (Startup): एक नव स्थापित कंपनी, जिसका उद्देश्य तेजी से बढ़ना है, अक्सर नवीन उत्पादों या सेवाओं को विकसित करके।
  • फिनटेक (Fintech): कंपनियाँ जो नवीन वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करती हैं, जो अक्सर पारंपरिक वित्तीय संस्थानों को चुनौती देती हैं।
  • इन्फ्लुएन्सर फटीग (Influencer Fatigue): एक ऐसी घटना जहाँ उपभोक्ता अत्यधिक प्रदर्शन के कारण सोशल मीडिया इन्फ्लुएन्सर और उनकी प्रायोजित सामग्री के प्रति असंवेदनशील या अविश्वासी हो जाते हैं।
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