साल 2025 में ट्रेडिशनल टीवी डिस्ट्रीब्यूटर्स को **1.1 करोड़** ग्राहकों का भारी नुकसान हुआ है। अब ये कंपनियां महंगे सेट-टॉप बॉक्स और हार्डवेयर खर्च से बचने के लिए ऐप-बेस्ड सर्विस मॉडल पर शिफ्ट हो रही हैं ताकि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स को टक्कर दे सकें।
भारत का टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, लीनियर पे-टीवी प्लेटफॉर्म्स से लगभग 1.1 करोड़ सब्सक्राइबर्स कम हुए हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए Dish TV, Tata Play और GTPL Hathway जैसी बड़ी कंपनियां अब सीधे ऐप-बेस्ड डिलीवरी मॉडल की ओर रुख कर रही हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इस बदलाव की मुख्य वजह 'कॉस्ट कटिंग' है। पारंपरिक DTH और केबल सर्विस में सेट-टॉप बॉक्स के इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस और सपोर्ट पर भारी खर्च होता है। अब कंपनियां इंटरनेट-आधारित ऐप्स के जरिए कंटेंट डिलीवर करके इस हार्डवेयर के बोझ को कम करना चाहती हैं। इससे ब्रॉडबैंड इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।
राह में हैं चुनौतियां
हालांकि, यह रास्ता आसान नहीं है। TRAI के कड़े टैरिफ नियम अब भी लीनियर कंटेंट पर लागू होते हैं, चाहे वह सैटेलाइट से आ रहा हो या इंटरनेट से। इसकी वजह से कंपनियों के लिए दाम घटाकर नई स्ट्रीमिंग कंपनियों से मुकाबला करना मुश्किल हो रहा है। JioStar और Sony Pictures Networks India जैसे ब्रॉडकास्टर्स इसे एक 'डिस्कवरी लेयर' मान रहे हैं, जहां लाइव टीवी और स्ट्रीमिंग एक ही जगह मिल सके।
बाजार का दबाव
फिलहाल यह सेक्टर दो तरफा मार झेल रहा है। एक तरफ सस्ता DD Free Dish है, तो दूसरी तरफ प्रीमियम OTT प्लेटफॉर्म्स। निवेशकों के लिए अब यह देखना जरूरी होगा कि क्या यह डिजिटल ट्रांजिशन कंपनियों के ARPU (Average Revenue Per User) को स्थिर रख पाएगा, या फिर गिरते सब्सक्राइबर्स का ट्रेंड अभी और जारी रहेगा।
